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Title: Need to confer ‘Bharat Ratna’ on Swtantryaveer Savarkar posthumousl.
श्री हंसराज गं. अहीर (चन्द्रपुर) : महोदय, मैं आपके द्वारा सरकार से एक विनती करने जा रहा हूं। देश की आजादी के लिए जिन लोगों ने संघर्ष किया, ऐसे कई भारत माता के वीर सपूतों को विस्मरण किया जा रहा है। आज वीर सावरकर जी की पुण्यतिथि पर मैंने देखा कि सभागृह में जो चित्र लगा हुआ है, उस पर माला भी नहीं पहनाई गई है। यह बहुत दुखद[I14] बात है। मैं आपके माध्यम से वीर सावरकर जी के स्मृति दिवस पर, आज उन्हें मरणोपरांत देश के सबसे बड़े नागरिक सम्मान भारत रत्न की उपाधि से पुरस्कृत करने की मांग करता हूं। वह एक ऐसे स्वतंत्रता संग्राम के योद्धा थे, जिन्होंने अपनी बाल्यावस्था से ही अंग्रेज हुकूमत के खिलाफ अपने आपको झौंक दिया था। स्वतंत्रता के प्रति निष्ठा तथा राष्ट्र भक्ति से प्रेरित वीर सावरकर जी ने अनेक क्रंतिकारियों को क्रंति की प्रेरणा दी। असंख्य युवाओं को अंग्रेज हुकूमत के खिलाफ खड़ा किया। उन्हें इस कार्य में सम्मिलित देख कर अंग्रेज सरकार ने उनके ऊपर कई आरोप लगवाए।
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उन्हें दो बार आजीवन कारावास की सजा सुनायी गई। काला पानी की सजा सुनाने पर उन्होंने निर्भय होकर कोर्ट में कहा था कि इतने वर्षों तक आपकी सरकार रहेगी, इसकी क्या गारंटी है। ऐसे निर्भय व्यक्ति जिस ने राष्ट्र को अपना पूर्ण जीवन दिया और अपने जीवन के करीब दस हजार दिन जेल में और स्थान बदलते हुए बिताए हैं, ऐसे प्रखर देशभक्त के लिए सरकार से विनती करता हूं कि उनकी राष्ट्रभक्ति, देशभक्ति को देखते हुए, उन्हें भारत रत्न की उपाधि देकर सम्मानित किया जाए। मैं आज के संदर्भ में एक छोटी सी बात कहने जा रहा हूं। 10.7.1910 को मार्सेलीस पर फ्रांस गवर्नमेंट ने उन्हें पकड़ा था, उसी स्थान पर मुम्बई का एक संगठन, उनका एक स्मारक बनाने जा रहा है, जिस के लिए केन्द्र सरकार की अनुमति चाहिए लेकिन इसके लिए सरकार विलम्ब कर रही है। मैं विनती करता हूं कि केन्द्र सरकार इसकी अनुमति प्रदान करे।