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Title: Need to ensure proper utilisation of funds for development of forest land particularly in Himachal Pradesh- Laid.
( मण्डी):अध्यक्ष महोदय, मैं आपके माध्यम से वन एवं पर्यावरण मंत्री महोदय के ध्यान में लाना चाहता हूं कि जब से वन संरक्षण अधनियम, १९८० लागू हुआ है तब से देश, विशेषकर हिमाचल प्रदेश में जहां जहां विकास कार्यो हेतु वन भूमि अथवा वृक्षों को उपयोग में लाया जाता है, वहां निर्माण कार्य करने वाला विभाग, वन विभाग के आकलन ( ऐसेसमेंट)के अनुसार लाखों और कहीं कहीं करोड़ों रूपए संबंधित वन मंडल में जमा कराता है। उदाहरणत: हिमाचल प्रदेश के कुल्लू जिले में नेशनल हाइड्रोइलैक्टि्रक कार्पोरेशन लमिटेड एवं मलाना जल विद्युत परियोजनाओं को कार्यान्वित करने के लिए संबंधित एजेंसियों द्वारा वन मंडल अधिकारी, शमशी (पार्वती डिवीजन)निदेशक, दि ग्रट हिमालयन नेशनल पार्क जिला कुल्लू को करोड़ों रूपए दिए गए।
वन अधनियम का मूल उद्देश्य यह है कि जहां भी विकास कार्यो हेतु जंगल काटे जाते हैं अथवा वन भूमि उपयोग में लायी जाती है, वहां उससे होने वाली क्षति की भरपाई पर खर्च नहीं किया जाकर प्रदेश के कंसोलिडेटेड फंड में जमा हो जाता है। फलस्वरूप अधिकांश राशि वनों की भरपाई की बजाय अन्य कार्यो पर व्यय की जाती है।
मेरी सरकार से मांग है कि सभी प्रांतों, विशेषकर हिमाचल प्रदेश से पूर्ण ब्यौरा मंगाया जाये और यह सुनिश्चित किया जाये कि इस राशि का सदुपयोग सिर्फ वनों की भरपाई के लिए संबंधित वन मंडल में ही हो।