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Need To Extend The Loan Waiver Scheme To Small Farmers In The Country. on 24 July, 2009

Lok Sabha Debates
Need To Extend The Loan Waiver Scheme To Small Farmers In The Country. on 24 July, 2009

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Title : Need to extend the loan waiver scheme to small farmers in the country.

 

श्री वीरेन्द्र कश्यप(शिमला): अध्यक्ष महोदया, मैं क्षमा चाहता हूं, मैं बाहर चला गया था। आपने मुझे दोबारा बोलने के लिए समय दिया, इसके लिए मैं आपका बहुत-बहुत आभार व्यक्त करता हूं।

          महोदया, मैं आपके माध्यम से सरकार के ध्यान में लाना चाहता हूं कि यूपीए की सरकार द्वारा घोषित की गई ऋण माफी योजना का लाभ देश के छोटे और विशेषकर हिमालयी राज्यों, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखण्ड एवं पूर्वोत्तर राज्यों के कृषकों और बागवानों को नहीं मिला है। पर्वतीय राज्यों के सहकारिता क्षेत्र के बैंकों, विशेषकर भूमि विकास बैंकों ने उन्हें कृषि उत्पादों के भण्डारण, विपणन, छिड़काव की पावर मशीनों, पावर टिलरों तथा पूल चैन वितरण व्यवथा के अंतर्गत कच्ची एवं संकरी सड़कों पर ट्रक नहीं चलने के कारण यूटीलिटी जीपों और अन्य छोटे वाहनों को खरीदने के लिए ऋण दिया, ताकि वह अपनी उपज को दूरदराज के क्षेत्रों से मण्डी तक पहुंचा सकें। उन्हें उक्त माफी योजना से कोई राहत नहीं मिली है। उक्त मदों के अंतर्गत दिए गए ऋण पर उन किसानों से 16 प्रतिशत से अधिक ब्याज वसूला जा रह है। अतः मेरा आपसे आग्रह है कि ऐसे किसानों के भी ऋण तत्काल प्रभाव से समाप्त किए जाएं।

          मैं आपके संज्ञान में लाना चाहता हूं कि हमारे जितने पहाड़ी राज्य हैं, उनमें बड़ी सड़कें तो नहीं बनी हैं, लेकिन जो छोटी सड़कें बनी हैं। उस वजह से वहां के बागवान और किसानों ने छोटी यूटीलिटी जीपें अपने यूज करने के लिए ली थीं। उसके लिए उन्होंने ऋण लिए थे। हमें उक्त बात की खुशी है कि एनडीए की सरकार के समय में पीएमजीएसवाई की वजह से बड़ी सड़कें बनी थीं, उस वजह से हमारे यहां के बागवान और किसान लाभान्वित हुए थे। परन्तु खेद का विषय यह है कि प्रश्नकाल के समय मंत्री जी कह रहे थे,…( व्यवधान)

अध्यक्ष महोदया : आप समाप्त कीजिए। दूसरे माननीय सदस्यों को भी बोलना है।

श्री वीरेन्द्र कश्यप : महोदया, एक मिनट में समाप्त कर दूंगा।

          जितने भी हिमालयी राज्य हैं, वहां पीएमजीएसवाई को कम किया गया है। मैं आपके ध्यान में लाना चाहता हूं कि हिमाचल प्रदेश में पिछली बार वर्ष2008-09 में 1660 स्कीमें थीं, लेकिन उसे घटाकर 1500 कर दिया गया। मैं आपके माध्यम से सरकार का ध्यान आकर्षित करना चाहता हूं कि जितने भी हिमालयी राज्य हैं, उनके लिए इस प्रकार की स्कीम्स बननी चाहिए, जिससे वहां के किसानों और बागवानों को लाभ हो।[r10]