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Title: Need to introduce a national Sindhi Television Channel and promote telecasting of Sindhi-based programmes in the country.
श्री श्रीचन्द कृपलानी (चित्तौड़गढ़): महोदय, वर्ष 1947 में भारत विभाजन के वक्त सिंधी परिवारों को अपने मूल प्रदेश (सिंध) से पलायन करना पड़ा, जिससे ये परिवार एवं समुदाय अपनी पहचान खोने लगे तथा अपनी पहचान को बचाने के लिए सिंधियों को कड़ी मेहनत करनी पड़ी। इसके लिए सिंधी साहित्य अकादमी कार्य कर रही है तथा वर्तमान में सिंधी परिवार देश के अनेक राज्यों में जीवन व्यतीत कर रहे हैं। आज के समय में अपनी भाषा, संस्कृति, कला को बचाने के लिए टेलीविजन ही सरल व सुगम माध्यम है।
जैसाकि आपको विदित है कि वर्तमान में अनेक राज्यों द्वारा सेटेलाईट के द्वारा अपने क्षेत्रीय चैनलों को प्रोत्साहित कर प्रसारण किया जा रहा है (जैसे डी.डी. मराठी, डी.डी. गुजराती, डी.डी.उड़िया, आदि) और हाल ही में केन्द्र सरकार द्वारा डी.डी. उर्दू चैनल का प्रसारण किया गया है। भारत में कोई सिंधी राज्य नहीं होने के कारण डी.डी. सिंधी चैनल का प्रसारण नहीं हो रहा है जबकि भारतीय संविधान में 22 क्षेत्रीय भाषाओं की अनुसूची में सिंधी भाषा 8वें स्थान पर है। सिंधी भाषा व संस्कृति बचाने के लिए डी.डी. सिंधी चैनल की आवश्यकता है।
अतः महोदय, आपके माध्यम से मेरा केन्द्र सरकार से अनुरोध है कि सिंधी भाषा के प्रोग्रामों को रोजाना डी.डी. चैनल पर सम्पूर्ण भारत में प्रसारण करने की व्यवस्था सुनिश्चित करें एवं इस समुदाय की भाषा व संस्कृति को बचाने के लिए एक अलग डी.डी. सिंधी टी.वी चैनल के प्रसारण का प्रावधान करें जिससे सिंधी समुदाय को हो रही कठिनाइयों को दूर किया जा सके एवं इसका प्रचार-प्रसार हो सके।