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Title : Need to protect the interests of labourers while implementing labour reforms.
श्री हंसराज जी. अहीर (चन्द्रपुर) : महोदय, भूमंडलीकरण तथा विश्व व्यापार संगठन के दबाव के कारण देश में नये श्रम सुधार कानून बनाये जा रहे हैं। श्रमिकों को अब सूचना प्रौद्योगिकी उद्योग क्षेत्र में श्रमिक संगठन स्थापित करने की अनुमति नहीं देने की इन सूचना क्षेत्र के उद्योगों की मांग को देखते हुए आगामी काल में श्रमिक हित की रक्षा करने के लिए सरकार द्वारा सजग रहकर सावधानी से कदम उठाने की जरूरत है। सरकार द्वारा इ.पी.एफ का ब्याज घटाने से श्रमिकों पर कुठाराघात हुआ है। श्रमिकों द्वारा भविष्यकालीन आजीविका सुनिश्चित करने में महत्वपूर्ण ई.पी.एफ का ब्याज घटाना श्रमिकों के हित में नहीं है।
देश में स्वदेशी उद्योग बीमार तथा बंद हो रहे हैं। बहुराष्ट्रीय कंपनियों से प्रतिस्पर्धा में पिछड़े इन उद्योगों के कामगार बडी संख्या में बेरोजगार हो गये। इनकी आजीविका के बारे में भी सरकार को सोचना होगा। उपभोक्ता तथा खुदरा क्षेत्र में बहुराष्ट्रीय कंपनियों को प्रत्यक्ष निवेश की अनुमति देने से स्थिति और बिगड़ सकती है। इन क्षेत्रों में उच्च प्रोद्योगिकी अपनाकर श्रमिकों का काम मशीनों द्वारा करने की नीति अपनाकर यहां पर भी कामगारों को बेरोजगार किया जा सकता है। खुदरा क्षेत्र के कामगार असंगठित हैं। उन्हें संरक्षण देने के लिए सरकार द्वारा उचित नीति बनाने की जरूरत है। श्रमिक नियमों को ताक पर रख बहुराष्ट्रीय कंपनियां बेरोजगारी को बढ़ावा दे रही है। अत: श्रमिक कानून का सख्ती से पालन सुनिश्चित कराना तथा नये श्रम कानून बनाते वक्त श्रमिक हितों का ध्यान रखने की आवश्यकता है।