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Title : Need to relax forest laws to facilitate developmental works in tribal dominated areas of Sabarkantha Parliamentary Constituency, Gujarat.
श्री महेन्द्रसिंह पी. चौहाण (साबरकांठा): मेरे संसदीय क्षेत्र साबरकांठा, गुजरात के अंतर्गत खेडब्रह्म, विजयनगर, मेघरज एवं भिलोडा आदिवासी बहुल जनसंख्या वाले चार ब्लाक हैं। इन ब्लाकों के अधिकतर गांव में वन कानूनों के कारण आजादी के 64 साल के बाद भी आज तक पक्की सड़कें नहीं बन पाई हैं। स्कूल के भवन नहीं बन पा रहे हैं और बुनियादी सेवाएं भी इन वन कानूनों के कारण आदिवासी लोगों तक नहीं पहुंच पा रही हैं, जिनके कारण इन आदिवासी लोगों का जीवन अत्यंत नारकीय एवं दयनीय हो गया है और विकास के अवसर भी उन्हें अन्य नागरिकों की तरह नहीं मिल पा रहे हैं। इन वन कानूनों के कारण सरकार की इंदिरा आवास योजना, पेयजल योजना, ग्रामीण सड़कें, राजीव ग्रामीण विद्युतीकरण योजना, ग्रामीण विकास की योजनाएं एवं अन्य विकास संबंध योजनाएं लागू नहीं हो पा रही हैं, जिसके कारण इन क्षेत्रों के आदिवासी देश की कल्याणकारी एवं विकास संबंधी योजनाओं से पूरी तरह से वंचित हैं। खेडब्रह्म ब्लाक के पालीयाबिया, मामा पिपला, विजयनगर के खेरवाडा जैसे बहुत से गांव ऐसे हैं जो आज भी विकास से वंचित हैं। बरसात ऋतु में गांव में आना-जाना बंद हो जाता है। बीमार लोग एवं महिलाओं को प्रसूति हेतु अस्पताल ले जाने में बहुत दिक्कत होती है।
सदन के माध्यम से सरकार से अनुरोध है कि आदिवासी बहुत जनसंख्या वाले गांवों में वन कानूनों में ढिलाई बरतकर बुनियादी सुविधाओं वाली योजनाओं को लागू किया जाये, जिससे आदिवासी लोग भारत के अन्य स्थानों जैसी सुविधाओं का लाभ उठा सकें।