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Title: Need to review the policy for setting up of Special Economic Zones in the country. .
श्री हंसराज गं. अहीर (चन्द्रपुर) : महोदय, केन्द्र सरकार द्वारा देश में विशेष आर्थिक क्षेत्र स्थापित करने की स्वीकृति देने के बाद देश में कतिपय राज्यों में इसका किसानों द्वारा किये जा रहे विरोध को देखते हुए इस नीति पर पुनर्विचार करने की आवश्यकता है। आज प्राथमिकता के आधार पर उद्योगों को विशेष सहूलियतें देकर उन्हें प्रश्रय देने की नीति के अंतर्गत विशेष आर्थिक क्षेत्रों की स्थापना हो रही है। सरकार द्वारा एस.ई.जेड को विकास का पैमाना मानकर देश में कृिा योग्य भूमि के अधिग्रहण कराये जा रहे हैं। आज देश में 1894 के भूमि अधिग्रहण कानून के अंतर्गत किसानों की भूमि अधिग्रहित की जा रही है। इतने पुराने कानून से किसानों को भूमि का ना उचित दाम मिलता है ना उनके विस्थापन पश्चात भलीभांति पुनर्वसन होता है। कृषि कार्य में संलग्न किसान विस्थापन के पश्चात झुग्गियों में रहने और मजदूरी करने के लिए बाध्य किये जा रहे हैं। एस.ई.जेड में इन किसानों को कैसे रोजगार दिया जा सकता है। क्या सरकार उद्योग स्थापित करने के लिए कर-सहूलियतें और कम दाम में भूमि उपलब्ध कराने में उद्योगों को सहायता दे सकती है। हमारी प्राथमिकता किसान और कृषि होनी चाहिए लेकिन सरकार की यह प्राथमिकता नहीं होने से देश के किसान और बदहाल होते जा रहे हैं। एस.ई.जेड के देश भर में हो रहे विरोध को इसका प्रतीक समझकर एस.ई.जेड पर पुनर्विचार करने तथा देश की प्राथमिकता में बदलाव कर इसे किसान और कृषि आधारित बनाने के लिए विचार करना आवश्यक है। मैं आपके माध्यम से सरकार से मांग करता हूं कि एस.ई.जेड पर पुनर्विचार करें।