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RAILWAY BUDGET 2004-05
Title: Presented the Budget estimates for the Indian Railways for the year 2004-05.
(SHRI LALU PRASAD) :
रेल बजट २००४-२००५
रेल मंत्री (श्री लालू प्रसाद) माननीय अध्यक्ष महोदय,
मैं भारतीय रेल के लिए वर्ष २००४-२००५ के बजट अनुमान प्रस्तुत करने जा रहा हूँ । पिछली सरकार ने ३० जनवरी, २००४ को अंतरिम बजट प्रस्तुत किया था जिसमें इस वित्तीय वर्ष के पहले चार माह के लिए रेलवे के खर्च हेतु लेखानुदान का अनुमोदन किया गया था ।
महोदय, यह संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन सरकार का, जिसने २२ मई, २००४ को कार्यभार संभाला है, प्रथम रेल बजट है । इस अल्प समय के भीतर मैंने उन चुनौतियों और कठिनाइयों को समझने की कोशिश की है जिनका रेलवे सामना कर रही है और न्यूनतम साझा कार्यक्रम के थ्रस्ट एरिया को ध्यान में रखते हुए इन कठिनाइयों से निपटने के उपायों की रूपरेखा बनाने का प्रयास किया है । इस संदर्भ में मैं इस सम्मानित सदन के माननीय सदस्यों के मूल्यवान सुझावों का भी स्वागत करूंगा । दरअसल, मैंने पहले ही इस सदन और राज्य सभा के सभी सदस्यों को, उनके क्षेत्रों में चल रही परियोजनाओं एवं प्रमुख कार्यों की सूची देने के साथ-साथ सुविधाओं में सुधार हेतु अपने बहुमूल्य सुझाव देने के लिए पत्र लिखा है । मैं सदन को आश्वस्त करना चाहूंगा कि इन सुझावों पर विशेष ध्यान दिया जाएगा तथा उपेक्षित क्षेत्रों को प्राथमिकता देते हुए परियोजनाओं से संबंधित प्रस्तावों पर यथोचित सर्वेक्षण करवाकर समुचित निर्णय लिए जाएंगे।
देश की मुख्य परिवहन व्यवस्था के रूप में एक ही प्रबंधन के अंतर्गत काम करने वाली भारतीय रेल को दुनिया की सबसे बड़ी प्रणालियों में से एक होने का गौरव प्राप्त है । देश की प्रगति में इसके योगदान को मापा नहीं जा सकता और इसे वाणिज्यिक संगठन के साथ-साथ सामान्य तौर पर समाज की आकांक्षाओं को पूरा करने वाली संस्था की दोहरी भूमिका भी निभानी पड़ती है । परोक्ष रूप से रोजगार उपलब्ध कराने की अपार क्षमता रखते हुए भारतीय रेल व्यापार, उद्योग और अर्थव्यवस्था के समग्र विकास में एक महत्वपूर्ण उत्प्रेरक है । इसे ध्यान में रखते हुए जैसा कि न्यूनतम साझा कार्यक्रम में उल्लेख किया गया है, संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन सरकार रेल अवसंरचना के विकास और विस्तार को सर्वोच्च प्राथमिकता देती है । पिछले कुछ वर्षों में रेलवे ने जिन कठिनाइयों का सामना किया है, विशेषकर संरक्षा के क्षेत्र में, उन्हें दूर करने की जरूरत है । महामहिम राष्ट्रपति जी का संसद के संयुक्त सत्र को संबोधित भाषण सरकार के आर्थिक और सामाजिक दोनों आयामों को ध्यान में रखते हुए रेल नेटवर्क को आधुनिक बनाने संबंधी इरादों को दिखलाता है ।
अपने ग्राहकों, चाहे वे माल यातायात से संबंधित हों या यात्री यातायात सेवाओं से, की आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए रेलवे ने बहुत से नीतिगत परिवर्तन किए हैं । सुधारों की प्रक्रिया को जारी रखते हुए रेलवे का आधुनिकीकरण, परिसंपत्तियों का बदलाव और नवीकरण, खास तौर पर रेलपथ नवीकरण और यात्रियों की संरक्षा ऐसे क्षेत्र होंगे जिन पर रेलवे विशेष बल देगी । सवारी डिब्बों और रेल परिसरों में, विशेषकर स्टेशनों पर सफाई तथा यात्री सुविधाओं में सुधार प्राथमिकता के अन्य क्षेत्र होंगे । व्यय पर नियंत्रण तथा राजस्व की चोरी को रोकने के उपायों को सुद्ृढ़ बनाना भी महत्वपूर्ण प्राथमिकता होगी ।
रेलवे पर निवेश के लिए संसाधनों की तंगी रही है जबकि संरक्षा, सिस्टम के विकास और विस्तार जैसे प्राथमिकता वाले क्षेत्रों पर ध्यान देने के लिए निवेश काफी ज्यादा बढ़ाने की जरूरत है । रेलवे जहां भी आवश्यक होगा, सुधार करने की लगातार कोशिश करेगी । इस विषय पर मैंने माननीय प्रधानमंत्री जी एवं वित्त मंत्री जी से विचार विमर्श किया है और उन्होंने वर्ष के दौरान अपेक्षित वित्तीय संसाधन उपलब्ध कराने के लिए आश्वस्त किया है ।
भारतीय रेल अपने आंतरिक संसाधनों के विकास के लिए कृतसंकल्प है । इसके लिए आवश्यक दोहरी रणनीति को हम पूरी गंभीरता और कड़ाई के साथ लागू करेंगे । एक ओर आमदनी बढ़ाने की दिशा में जोरदार मार्केटिंग अभियान छेड़ा जाएगा और आय के क्षय से संबंधित सभी चिन्हित बिन्दुओं जैसे बेटिकट यात्रा व अन्य कदाचारों आदि को रोका जाएगा । दूसरी ओर परिचालन व्यय को किसी भी दशा में न्यूनतम आवश्यकता से अधिक नहीं होने दिया जाएगा । मानव संसाधन का इष्टतम उपयोग करते हुए अन्य परिसंपत्तियों को लागत प्रभावी ढंग से प्रयोग में लाया जाएगा । सामान्य खर्चों में पूर्ण मितव्ययता बरती जाएगी ।