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Problems Being Faced By The Sugarcane Growers Due To Non-Payment Of … on 30 April, 2010

Lok Sabha Debates
Problems Being Faced By The Sugarcane Growers Due To Non-Payment Of … on 30 April, 2010


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Title: Problems being faced by the sugarcane growers due to non-payment of their dues by sugar mills in the country.

श्री जगदम्बिका पाल (डुमरियागंज): अध्यक्ष महोदया जी, मैं आपका अत्यन्त आभारी हूं कि आपने देश के करोड़ों किसानों से जुड़े हुए लोक महत्व के प्रश्न को उठाने की अनुमति दी है। आज संपूर्ण देश में किसानों की अगर कोई कैश-क्रॉप है या कोई नगदी फसल है तो पूरे देश का किसान गन्ने की आय पर ही निर्भर करता है। किसान के घर के जीविकोपार्जन की बात हो या उनके घर की न्यूनतम प्रतिपूर्ति का सवाल हो, उसकी प्रतिपूर्ति गन्ने की नगदी फसल से ही होती है। आपने पिछले दिनों देखा कि संपूर्ण उत्तर भारत के किसान गन्ना मूल्य को लेकर, देश की राजधानी दिल्ली में आये थे और जिस तरह संघर्ष और आंदोलन के बाद, उनके गन्ना मूल्य का निर्धारण हुआ और आज मूल्य निर्धारण के बाद, किसानों ने अपने गन्ने को चीनी-मिलों को दिया। चीनी मिलों में गन्ना पिराई का वर्ष 2009-2010 का सत्र समाप्त हो चुका है और इंडियन शुगर कंट्रोल एक्ट की धारा(पांच) में है कि अगर किसान जिस दिन अपना गन्ना चीनी मिलों को देता है, उसकी आपूर्ति के 15 दिन बाद, उसके गन्ने के मूल्य का भुगतान करना मिल की बाध्यता है, यह अधिनियम में है। अगर वह गन्ने का भुगतान नहीं करता है तो उस गन्ना मूल्य पर उसे 10 प्रतिशत ब्याज भी मिलेगा। आप देखिये कि अगर और जगहों पर अधिनियम लागू हैं तो उस अधिनियम का अनुपालन हो रहा है, लाभ हो रहा है लेकिन देश के करोड़ों किसान जो असंगठित हैं, इस नाते उनका कोई दबाव नहीं है और आज ये चीनी मिलें, चाहे वे इंडियन शुगर मिल एसोसिएशन (एस्मा) से जुड़ी हुई हों, चाहे निजी क्षेत्र की हों या सहकारी क्षेत्र की हों, चाहे संघ क्षेत्र की चीनी मिलें हों, मैं भारी मन से कह रहा हूं को करोड़ों रुपया गन्ना मूल्य मिलों पर बाकी है।

          इससे सभी सहमत होंगे कि अगर गन्ना कैश-क्रॉप है, गन्ना नगदी फसल है तो किसान अपनी बेटी का विवाह, उन्हीं गन्ने की पर्चियों के भुगतान से करता है। उत्तर प्रदेश और अन्य राज्यों के लोग भी सहमत होंगे कि अगर किसान को उस गन्ने के मूल्य का भुगतान नहीं होता है तो किसान की बेटी का विवाह भी स्थगित हो जाता है। ये बातें हम आये दिन देखते हैं और हम इसमें कितना सहयोग कर सकते हैं। बूढ़े बाप के इलाज के लिए मेडीकल कॉलिज ले जाने के लिए किसान के पास कोई पैसा नहीं होता है, उन्हीं पर्चियों को गिरवी रखकर पैसा देता है और जब गिरवी रखने के बाद भी भुगतान मिलें नहीं करती हैं, कई सोसाइटियां नहीं करती हैं तो उनके सामने आत्महत्या की स्थिति आ जाती है। बच्चों के स्कूल से नाम कट जाते हैं, उनकी फीस नहीं दी जा सकती है। …( व्यवधान) आज उत्तर प्रदेश में 1111 करोड़ 95 लाख रुपया बाकी है। ग्यारह सौ करोड़ रुपया गन्ना किसानों का है, यह किसी एक व्यक्ति का नहीं है। किसी का दो हजार, किसी का चार हजार है। इस तरह से 128 मिलों पर रुपया बाकी है। यह इंडियन शुगर कंट्रोल एक्ट से होता है कि  उन मिलों के खिलाफ रिकवरी जारी होनी चाहिए, आरसी सर्टिफिकेट जारी होना चाहिए और इसके बाद भी भुगतान नहीं करते हैं तो उसका क्या कारण है? अगर किसान खाद, बीज और पंपिंग सैट के लिए लिया पैसा बैंक को नहीं देता है तो वह तो लॉक-अप में बंद हो जाता है।

लोकअप में बंद हो जाता है, आरसी जारी हो जाती है और ये मिल मालिक करोड़ों रुपया गन्ना मूल्य नहीं दे रहे हैं, तो एयरकंडीशंड घरों में बैठे हुए हैं। इनके खिलाफ राज्य सरकारें आरसी जारी नहीं कर रही हैं।

अध्यक्ष महोदया : आप अपनी बात समाप्त कीजिए।

श्री जगदम्बिका पाल : महोदया, इससे महत्वपूर्ण कोई बात नहीं हो सकती है। 1100 करोड़ रुपया उत्तर प्रदेश के किसानों पर बाकी है। मैं कहना चाहता हूं कि 565 लाख टन गन्ने की पिराई हुई है। किसान रोज केन सोसायटीज के चक्कर लगा रहा है, लेकिन कोई कदम भी राज्य सरकार द्वारा नहीं उठाया गया है। बहुजन समाज पार्टी की सरकार के कार्यकाल के तीन साल पूरे होने जा रहे हैं, कम से कम अपना कार्यकाल पूरा होने से पहले उन मिल मालिकों के खिलाफ कार्यवाही करे। गन्ना भुगतान करना सुनिश्चित जिम्मेदारी है।…( व्यवधान)

अध्यक्ष महोदया : आप बैठ जाएं।

          श्री रेवती रमन सिंह, आप बोलिए।

…( व्यवधान)

श्री जगदम्बिका पाल : 1100 करोड़ रुपयों का गन्ना मूल्य बाकी है। मैं किसानों के हित की बात कह रहा हूं।…( व्यवधान)

अध्यक्ष महोदया : कुछ भी रिकार्ड में नहीं जाएगा।

          श्री रेवती रमन सिंह।

…( व्यवधान)*

अध्यक्ष महोदया : अगर आप अपने को सम्बद्ध करना चाहते हैं, तो आप अपना नाम टेबल पर भेज दीजिए।

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डॉ. विनय कुमार पाण्डेय (श्रावस्ती):महोदया, मैं अपने को श्री जगदम्बिका पाल द्वारा गन्ना किसानों की समस्या मुद्दे से सम्बद्ध करता हूं।

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श्री पन्ना लाल पुनिया (बाराबंकी):महोदया, मैं भी अपने को श्री जगदम्बिका पाल द्वारा गन्ना किसानों की समस्या मुद्दे से सम्बद्ध करता हूं।