Judgements

Regarding Acquisition Of Farmer’S Arable Land By The Government … on 25 August, 2006

Lok Sabha Debates
Regarding Acquisition Of Farmer’S Arable Land By The Government … on 25 August, 2006

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Title : Regarding acquisition of farmer’s arable land by the Government Authorities at a very low rate.

श्री अशोक प्रधान (खुर्जा) : महोदय, आज देश का किसान असहाय और बेबस महसूस कर रहा है। हम सदन में हर सत्र में किसानों की दयनीय हालत पर चर्चा करते हैं। कल भी देर रात तक किसानों की स्थिति पर चर्चा करते रहे हैं, लेकिन वास्तविकता कुछ और है।

महोदय, आज किसान केवल कर्जे के लिए ही आत्महत्या नहीं कर रहा है, अपितु उसकी फसल की उचित कीमत का न मिलना, उसे बिजली-पानी समय पर न मिलना, कम रेट पर ऋण का न मिलना, उसकी जमीन का कम कीमत पर अधिग्रहण करना, उसकी फसल बाढ़ में बह जाना, सूखे से खेती का तबाह हो जाना और उसके बाद उसे सरकार से उचित सहायता न मिलना।

महोदय, मेरे संसदीय क्षेत्र खुर्जा में नाएडा, ग्रेटर नोएडा और दादरी में ग्रेटर नोएडा फेस-२ प्राधिकरण है तथा सिकंदराबाद में यूपीएसआईडीसी है। ये सब सरकार की एजेंसीज़ हैं। ये जमीन का अधिग्रहण करके उद्योगपतियों, शिक्षण संस्थाओं, बड़े-बड़े व्यापारियों, बड़े-बड़े कालोनाइजरों और टाउनशिप व व्यावसायिक केन्द्र (मॉल) आदि एवं अन्य योजनाओं के लिए किसानों की जमीन को कौड़ियों के भाव अधिग्रहण कर हजारों और लाखों रूपए प्रतिवर्ग गज के हिसाब से बेचते हैं। मैं उदाहरण् के लिए बताना चाहूंगा कि नोएडा, ग्रेटर नोएडा में केवल लगभग ३००-४०० रूपए प्रतिवर्ग गज के हिसाब से जमीन का मुआवजा किसानों को दिया जाता है और उनसे बलपूर्वक कब्जा ले लिया जाता है, फिर उस जमीन को

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*The speech was laid on the Table.

उपरोक्तों को हजारों और लाखों रूपए प्रतिवर्ग गज के हिसाब से बेचा जाता है। ग्रेटर नोएडा फेस-२ बनाया गया है जो कि दादरी की जमीन का इसी तरह से अधिग्रहण करके बड़े-बड़े उद्योगपतियों/व्यापारियों को बेचा जाएगा।

मान्यवर, मेरे संसदीय क्षेत्र में, सिकंदराबाद विधानसभा क्षेत्र के तकरीबन १०-१५ गांवों जिनमें, हमीदपुर, सराय जगन्नाथ, सराय दूल्हा, आशा देई प्रानगढ़, शहबाजपुर, बोढ़ा, तालिबपुर उर्फ कनकपुर, लुहाकर, आसफपुर, जौली, मल्लपुर, महताब नगर, नंगला चीनी, निजामपुर आदि की जमीनों का अधिग्रहण यूपीएसआईडीसी कर रहा है और किसानों की जमीनों की कीमत १३,१५ और १८ रूपए प्रतिवर्ग गज के हिसाब से दे रहा है। जबकि वहां जमीन की जमीन की कीमत हजार रूपए प्रतिवर्ग गज से भी ज्यादा है और निजी लोग वहां इस कीमत पर खरीद रहे हैं और खरीदने को तैयार हैं। यूपीएसआईडीसी के द्वारा किसानों का यह शोषण नहीं तो और क्या है?

ऐसे ही खुर्जा विधानसभा के भी कुछ गांवों की जमीन यूपीएसआईडीसी ने वर्षों से कौड़ियों के भाव ले रखी है। आज किसान बेबस हैं और अपने आपको असहाय महसूस कर रहे हैं। इसको तुरंत रोका जाना चाहिए और वर्तमान मूल्य के अनुसार वहां के किसानों को जमीन की कीमत मिलनी चाहिए।

मान्यवर, मेरा इस देश की महापंचायत जिसमें मुझे भी मेरे क्षेत्र की सम्मानित जनता ने चुनकर भेजा है, से निवेदन है कि कोई ऐसी ठोस योजना ये सदन बनाए कि जिससे प्रदेश की सरकारें और प्रदेश की एजेंसियां किसानों का शोषण न कर सकें। किसान के साथ टेबल पर बैठकर ये एजेंसियां समझौते के हिसाब से जमीन की कीमत तय करें और वहां जो उद्योग लगें व अन्य योजनाएं बनें, उनमें इन एजेंसियों के माध्यम से किसानों के बच्चों को नौकरी मिले, उनकी व्यवसाय में भागीदारी हो, किसानों के गांवों का विकास हो, किसानों के बच्चों को शिक्षा के साधन उपलब्ध कराए जाएं। इसके अलावा किसानों की जितनी जमीन का अधिग्रहण हो, उसमें से १० प्रतिशत जमीन किसानों को दी जाए, जिससे किसान भी देश के व्यवसाय की मुख्य धारा से जुड़कर अपने आपको आर्थिक और सामाजिक रूप से सक्षम महसूस कर सके और सम्मान का जीवन जी सके तथा २१वीं सदी के भारत में अपना योगदान दे सके।

मैं पुन: एक बार फिर सम्मानित सदन के माननीय सदस्यों से अपील करता हूं कि किसानों के शोषण को रोकने के लिए दलीय राजनीति से ऊपर उठकर किसानों का शोषण रोका जाए और उनके लिए वे सभी सुख-सुविधाएं उपलब्ध कराने का संकल्प लें। धन्यवाद।