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Title: Regarding alleged misuse of MPLAD and Rural Development funds by the State Governments and its officers.
श्री शैलेन्द्र कुमार (चायल): सभापति महोदय, मैं आपको धन्यवाद देता हूं कि आपने मुझे अति लोक महत्व के प्रश्न पर बोलने का अवसर दिया। मैं पूर्व में भी यह मामला सदन में उठा चुका हूं और पुनः उठाना चाहता हूं। उत्तर प्रदेश में जब से बहुजन समाज पार्टी की सरकार आई है, सांसद निधि और भारत सरकार द्वारा ग्रामीण विकास मंत्रालय की जो भी परियोजनाएं हैं, उन पर बंदरबांट हो रहा है। यही नहीं, जिले में जब डीआरडीए की बैठक होती है, तब मनमाने ढंग से वहां जन प्रतिनिधि इंदिरा आवास का बंदरबांट करते हैं। इसी तरह से हैंडपम्प्स का भी बंदरबांट होता है। क्षेत्र के सांसद को पूछा नहीं जाता और न उनसे कोई योजना ली जा रही है। यही नहीं, पूरे उत्तर प्रदेश में अम्बेडकर गांवों का ही विकास हो रहा है, अन्य गांवों को छोड़ा जा रहा है। अगर हम इसकी शिकायत जिला अधिकारी या सीडीओ से करते हैं, तो पहले तो वे हमारी बात सुनते ही नहीं और जब सुनते हैं तो कहते हैं कि हमें पहले अम्बेडकर गांवों को देखना है। अगर ऐसा नहीं करेंगे तो हम रह नहीं पाएंगे।
दूसरी बात मैं यह कहना चाहूंगा कि जहां तक सांसद निधि की बात है, इसे या तो बढ़ाया जाए या फिर खत्म कर दिया जाए, क्योंकि इतनी कम राशि में क्षेत्र का विकास नहीं हो पा रहा है। इसके अलावा सांसदों पर इसका कुप्रचार करके साजिश होती है। मैं आपके माध्यम से केन्द्र सरकार से कहना चाहता हूं कि सांसद निधि और ग्रामीण विकास मंत्रालय द्वारा जो निगरानी समितियां मंत्री जी ने गठित की हैं, उनमें अध्यक्ष को सुना नहीं जाता। जब हम डीआरडीए में जाते हैं तो देखते हैं कि वहां भी बंदरबांट हो रही है। इसलिए भारत सरकार इस पर ध्यान देकर समुचित कार्यवाही करे और एम.पीज़., एम.एल.एज़ और एम.एल.सीज़. सबकी बराबर की भागीदारी सुनिश्चित करे।