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Title: Regarding alleged police firing and killing of three persons during a peaceful demonstration of farmers in a sugar mill in Basti, Uttar Pradesh on 11 December, 2002.
(महाराजगंज, उ.प्र.) : माननीय अध्यक्ष महोदय, ११ दिसम्बर को उत्तर प्रदेश के बस्ती जनपद में मुण्डेरवा चीनी मिल पर शान्तिपूर्वक तरीके से बकाया गन्ना मूल्य के भुगतान तथा गन्ना मूल्य निर्धारित करने के लिये जब किसान धरना दे रहे थे, वहां पुलिस द्वारा गोली चलाये जाने के पश्चात् तीन किसानों की मौत हो गई। इसी संदर्भ में १२.१२.०२ को हमने कार्य स्थगन प्रस्ताव के माध्यम से आपको सूचना दी थी। जब १२.०० बजे के बाद आदरणीय प्रधान मंत्री जी सदन में आये तो उन्होंने शाम को वक्तव्य देने का आश्वासन दिया। उसी क्रम में जब खाद्य मंत्री जी ने वक्तव्य दिया तो उन्होंने उसमें मात्र एक किसान के मारे जाने की बात बताई। इस वक्तव्य से हम लोग सहमत नहीं थे। हमारे नेता माननीय श्री मुलायम सिंह जी ने हमें निर्देशित किया कि हम तत्काल घटनास्थल पर जायें और सत्यता का पता लगाकर वास्तविकता से उन्हें अवगत करायें। उनके निर्देशानुसार जब हम १३.१२.०२ को बस्ती गये तो पूरा बस्ती जनपद पुलिस छावनी के रूप में तबदील था। जब हमने वहां जाकर किसान परिवारों के करुण-क्रन्दन को सुना, निश्चित तौर पर हमें इस बात का अहसास हुआ कि हमारे जैसे लोग संसद में चुनकर क्यों आ रहे हैं। सरकार ने जो गलतबयानी की, उसका जीता-जागता उदाहरण मुंडेरवा कांड है। मुण्डेरवा चीनी मिल गेट से मात्र १०० मीटर की दूरी पर जो दूसरा रेलवे ढाला था, उसके करीब रेलवे लाइन के पास जो इनसानी खून से सनी मिट्टी है, वह इस बात की गवाही दे रही है कि आजादी के बाद भी पुलिस ने किस निर्ममतापूर्वक, क्रूरतापूर्वक और जघन्यतापूर्वक किसानों की हत्या की है। चीनी मिल गेट पर दो किसान मारे गये जबकि दूसरे ढाले के पश्चिम तरफ एक किसान मारा गया। एक किसान- बदरी चौधरी – जहां धरना दे रहे थे, वहां से मात्र ५० मीटर पर मारे गये । मुझे आपसे इस संदर्भ में यह भी कहना है कि न केवल पुलिस ने लोगों को मारा-पीटा बल्कि व्यापारियों की दुकानों को लूट लिया गया। संजय कुमार मोदनवाल और अनिल कुमार मोदनवाल की चाय की दुकान को लूट लिया गया। जयराम चौधरी की चाय की दुकान को भी लूट लिया गया। जोखन अग्रहरि, अमीन चौधरी, बाल्मीकि वर्मा के पैरों-हाथों को मारकर तोड़ा गया। सैंकड़ों लोग घायल हैं। जब उन लोगों को पता चला कि समाजवादी पार्टी के प्रतनधिमंडल के सदस्य के रूप में मैं वहां आया हुआ हूं तो हजारों की भीड़ वहां इकट्ठा हो गई और उन लोगों ने आपबीती सुनाई। उससे मुझे लगा कि देश की आजादी के दौर में अंग्रेजों ने जिस बर्बरता का परिचय दिया था, देश की आजादी के बाद भी हिन्दुस्तान की पुलिस ने एक बार फिर से किसानों के साथ बर्बरता का परिचय मुण्डेरवा चीनी मिल गेट पर दिया । इससे निश्चित तौर पर मानवता दहल उठी है। हम आपके माध्यम से कहना चाहते हैं…( व्यवधान)
अध्यक्ष महोदय : आप जानते हैं कि इस विषय पर चर्चा होनी है।
कुंवर अखिलेश सिंह: अध्यक्ष महोदय, पुलिस ने निर्दोष किसान को जेलों में बंद रखा है। आज किसानों को उनके खेतों और अन्य गतवधियों में आने-आने से रोका जा रहा है, इस पर तत्काल अंकुश लगाया जाये। सरकार ने जो गलतबयानी की है, उसके खिलाफ कार्यवाही की जाये। जो पोस्टमार्टम रिपोर्ट है, उससे साबित हो गया है कि किसानों की मौत गोली लगने से हुई है। इसलिये आपसे विनम्रतापूर्वक आग्रह है कि जिन किसानों को जेलों में बंद किया गया है, उन्हें तत्काल रिहा किया जाये। जो मृतक किसान हैं, उनके परिवार वालों को २०-२० लाख रुपये मुआवजे के तौर पर दिये जाये और जो लोग घायल हैं, उन्हें पांच-पांच लाख रुपये मुआवजे में दिये जायें।
जिन लोगों ने किसानों की हत्याएं करने का काम किया है, उन्हें तत्काल गिरफ्तार करके जेल में डाला जाए।
अध्यक्ष महोदय : चर्चा में आप पूरी बात बोलिये।
कुंवर अखिलेश सिंह: उत्तर प्रदेश सरकार ने गलत रिपोर्ट सदन में दी है, इसलिए उत्तर प्रदेश सरकार को तत्काल बर्खास्त किया जाए और उत्तर प्रदेश सरकार की जिस गलतबयानी को सदन में व्यक्त किया है, उसके कारण भारत सरकार के खाद्य और आपूर्ति मंत्री श्री शरद यादव को भी तत्काल बर्खास्त किया जाए।