Judgements

Regarding Centrally Sponsored Schemes. on 10 March, 2006

Lok Sabha Debates
Regarding Centrally Sponsored Schemes. on 10 March, 2006


an>

Title : Regarding Centrally sponsored schemes.

चौधरी लाल सिंह (उधमपुर) : उपाध्यक्ष महोदय, मैं आपकी इजाजत से हाउस का और सरकार का ध्यान आकर्षित करना चाहूंगा कि हिंदुस्तान गवर्नमेंट की ओर से सेंट्रली स्पौंसर्ड स्कीम्स अलग-अलग नाम से हमेशा राज्यों में जाती रही हैं। उनका मकसद और उनके सिस्टम के बारे में मैं एक उदाहरण आपके सामने देना चाहूंगा। जैसे – एक स्कीम जवाहर रोजगार योजना बनायी गयी, उसमें रोजगार देने की बात की गयी, अभी इस स्कीम ने अपना काम पूरा नहीं किया है और स्कीम खत्म हो गयी तथा स्कीम का नाम बदलकर इंप्लायमेंट अश्योरेंस स्कीम रख दिया गया । उसमें जेआरवाई के अन्तर्गत जो काम हुए थे, वे वहीं टिके रहे। किसी की गली बन रही थी लेकिन आधी रह गई। कहीं सड़क बन रही थी लेकिन छूट गई, कहीं बिल्िंडग का काम हुआ लेकिन छत बननी रह गई। फिर अगली स्कीम चल पड़ी। नई स्कीम आई। वह आधी शुरू हुई लेकिन खत्म हो गई। एक और नाम आ गया। उसे स्वर्ण जयन्ती स्व:रोजगार नाम दे दिया गया।

उपाध्यक्ष महोदय: क्या आपको पता है कि आप रूलिंग पार्टी से हैं?

चौधरी लाल सिंह : मैं सौ फीसदी सही कह रहा हूं। मैं आपनी पार्टी के हक में बात कर रहा हूं और गलतियों को दुरुस्त करने की बात कह रहा हूं। नाबार्ड भी यहां पर आई। सीआरएफ स्कीम बनी। नेशनल रूरल एम्पलॉयमैंट गारंटी एक्ट बना। ऑपरेशन ब्लैक बोर्ड बना। सारी स्कीमें आम लोगों के लिए बनती हैं लेकिन हर स्टेट की अलग-अलग मुश्किलें और सिस्टम हैं। उनको जमीनी सतह पर नहीं देखा जाता है।

उपाध्यक्ष महोदय: आपको भाषण नहीं करना है। अपनी बात खत्म करिए।

चौधरी लाल सिंह :  मैं भाषण नहीं करता हूं। हमारे यहां इस योजना के अन्तर्गत काम हुए। जब एक स्कीम दूसरे के नाम पर आती है तो सारे काम दूसरी स्कीम को हैंड ओवर करने चाहिए। अगर वे हैंड ओवर नहीं होते हैं तो वे काम नहीं हो पाते हैं। जिस भी स्कीम का नाम चेंज हो, उसमें इन सब चीजें को देखना चाहिए। आपने २०० जिले लिए हैं। जो दूसरे जिले नहीं लिए हैं उनको भी लिया जाए क्योंकि एम्पलॉयमैंट का सवाल है। इसकी तरफ ध्यान देना होगा वरना मकसद हल नहीं होगा।