Title: Regarding empowerment of Panchayats in Bihar.
श्री रामचन्द्र पासवान (रोसेड़ा): माननीय अध्यक्ष महोदय, मैं आपके माध्यम से महत्वपूर्ण विषयों की ओर सरकार का ध्यान आकर्षित करना चाहता हूं। बिहार में पंचायतीराज का गठन हुआ है, चुनाव हुआ है, जो कोर्ट के आदेश के अनुसार हुआ है, लेकिन आज दो साल बीत जाने के बाद भी वहां किसी भी तरह का कोई सांवैधानिक अधिकार पंचायत सदस्यों को नहीं दिया गया है। श्री राम विलास पासवान, श्री चतुरानन मिश्र और अन्य तमाम राजनीति विशेषज्ञों के माध्यम से लोक जनशक्ति पार्टी ने बिहार प्रदेश में जितने भी पंचायतीराज और जिला परिषदों के प्रतनधि हैं, उनकी मीटिंग २२ अप्रैल, २००३ को हुई है और सभी लोगों ने इस पर अपनी चिन्ता प्रकट की है। अत: मैं आपके माध्यम से सदन में निवेदन करना चाहता हूं कि बिहार में विकास का कार्य बिल्कुल ठप्प पड़ा है। बिहार की जो सरकार है वह एक प्रकार से लाठी से अपनी सरकार चलाना चाह रही है।
दूसरी तरफ केन्द्र की सरकार त्रिशूल बांट कर सरकार चलाना चाहती है। क्या इस तरह त्रिशूल और लाठी को छोड़ कर बिहार के जितने स्थानीय पंचायत एवं जिला परिषद के प्रतनधि हैं, उन्हें संवैधानिक अधिकार कब तक दिया जाएगा, यह हम जानना चाहते हैं?…( व्यवधान)
डॉ. रघुवंश प्रसाद सिंह :ग्राम पंचायत में जो लोग चुने गए हैं, उन्हें सारे अधिकार दे दिए हैं।…( व्यवधान)लेकिन जो ६०० करोड़ रुपए भारत सरकार ने रोक कर रखे हैं, उसके लिए लोग नहीं बोल रहे हैं।…( व्यवधान)
अध्यक्ष महोदय : रघुवंश जी, मैंने आपको बोलने की इजाज़त नहीं दी है।