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Lok Sabha Debates
Regarding Insulting The Members Of Parliament And Atrocities … on 18 August, 2000

Title: Regarding insulting the Members of Parliament and atrocities committed by the local police and the administration of Etah, U.P. to prevent them from joining a rally organised by the Samajwadi Party in protest against the misbehaviour of the D.M. and the S.S.P. in the district and also requested to constitute an enquiry committee and referred the same to the Privileges Committee.

श्री मुलायम सिंह यादव (सम्भल) : अध्यक्ष महोदय, कल आपने जो सहयोग दिया, उसके लिए मैं आपको धन्यवाद देता हूं। इसकी वजह से हमें मुश्किल से सभा में पहुंचने का अवसर मिला। मैं संक्षेप में दो बातें कहना चाहता हूं।

एटा जनपद के डी.एम. श्री अजित कुमार टंडन और एटा के एस.एस.पी. श्री शीतला प्रसाद के उत्पीड़न और दमनकारी हरकतों के सम्बन्ध में समाजवादी पार्टी ने एक रैली आय़ोजित की। मैं विस्तार में नहीं जाना चाहता कि विधायकों के साथ क्या हुआ? जिला बदल किया गया, रासुका की कार्रवाई की गई और मकान डैमोलिश किए गए। ये सब छ: महीने से लगातार चल रहा है। मैं यह बात आपके नोटिस में इसलिए लाना चाहता हूं कि इसके विरोध में एक रैली १७ अगस्त को आयोजित की गई थी। इसलिए मैंने सभी नेताओं और आपसे यह निवेदन किया था कि कश्मीर में अमरनाथ यात्रा के समय जिन तीर्थयात्रियों की हत्या हुई, उस पर २१ तारीख को बहस कराई जाए। हम जब एटा पहुंचे तो मुझे टॉयलट के लिए निरीक्षण भवन में जाना था। उसके चारों तरफ बैरिकेट्स लगा कर रोक लगा दी। रासुकधारी एक नहीं थे। उनकी एक-एक बटालियन खड़ी कर दी गई। वहां करीब २०-२५ जिलों की पुलिस बुलाई गई थी। यह बात रिकॉर्ड में भी है। सभा को रोकने के लिए पूरे जनपद में लगभग एक हजार बैरिकेट्स लगा कर रोक लगाई गई। मैं वहां पौने ग्यारह बजे पहुंच गया। पर्चे छपे हुए थे। ग्यारह बजे की सभा थी। जब मेरे साथियों ने बैरिकेट्स हटाए, तब मैं टॉयलट पहुंचा लेकिन वहां कोई कर्मचारी नहीं था। मुझे एक चपरासी मिला लेकिन वह भी भाग गया। उसने कहा कि वह कलैक्टर साहब की इंतजार में है और एस.एस.पी. का आदेश है कि वहां कोई नहीं रुकेगा। किसी तरह एक दरवाजा खुला रह गया। हम वहां पहुंचे। हम चार सांसद थे। श्री बलराम सिंह यादव, रघुनाथ सिंह शाक्य, कुंवर अखिलेश सिंह और मैं था। उत्तर प्रदेश विधान सभा के ऑपोजिशन लीडर, एक दर्जन विधायक, अन्य तमाम कार्यकर्त्ता और वहां के लोकल एम.एल.सी. थे। ये सब लोग वहां पहुंचे। बाथरूम तीन दिन से गंदा पड़ा था। वहां न तौलिया था. न साबुन था। तीन प्रेस वाले किसी तरह प्रवेश कर गए। हम जिस रास्ते से आए थे, वह गंदा था और वहां से बदबू आ रही थी। किसी तरह सुरक्षा बल के आदमी के पास से साबुन मिल गया। मैंने उससे हाथ-मुंह धोया, फ्रैश हुआ और चलने लगा। हमने जो बैरिकेट हटाया था, उस जगह पी.ए.सी. की बसें लगा दी गईं। उसके आगे आगरा रोड होकर एक रास्ता था। वहां भी बैरिकेट्स लगा दिए गए और पुलिस को खड़ा कर दिया गया। हमें पता लगा कि कलैक्टर के यहां से होकर कचहरी की तरफ से एक रास्ता जाता है। वहां भी बैरिकेट्स और पी.ए.सी. की बसें लगा दी गईं। तीसरा रास्ता जी.टी. रोड जाता था। लोग वहां पहुंचे तो देखा कि बैरिकेट्स, तमाम पी.ए.सी. पुलिस और ट्रक लगा दिए गए। हमें किसी तरह सभा में जाने से रोका जा रहा था। जो सभा में जा रहे थे उन पर डंडे और लाठी बरसाए गए। किसी को जोर-जोर से थप्पड़ मारे जा रहे थे। हमारे साथ दो लाउड स्पीकर की गाड़ियां चल रही थी। उनको वहीं रोक दिया गया। सभा में ग्यारह बजे जाना था। एक बज गए, दो बज गए, उस समय पता लगा कि किसी तरह लोक सभा में यह सवाल उठा है।

वहां के अधिकारियो ने भी कहा, वे नाम नहीं लेना चाहते कि एस.पी. और डी.एम. का दिमाग खराब हो गया है। सब को रोक कर समस्यायें पैदा कर रहे हैं। इसी तरह एक पी.ए.सी. का जवान आ गया, उसने डयूटी नहीं देनी थी तो उससे कहा गया कि अपने कपड़े उतारो, अपनी वर्दी उतारो। उसने कहा कि वर्दी उतारना तो दूर, मैं इसको फाड़ दूंगा। उसके बाद उसने वर्दी उतार दी और वह सविल ड्रेस में आ गया। उसके साथ क्या उत्पीड़न हो रहा होगा, मुझे मालूम नहीं। वहां के लोकल अधिकारी भी दुखी थे कि आखिर हम लोगों को क्यों रोका गया। साढ़े तीन घंटे सभा में जाने से रोका गया। जब यहां पता चला और पत्रकारों ने बताया तो अध्यक्ष महोदय ने हमारे कुछ नेताओं के कहने पर संसदीय कार्य मत्री तथा गृह मंत्री जी ने हस्तक्षेप किया, तब मैं सभा मे पहुंच सका। जो सभा एक बजे समाप्त होनी थी, वह शाम चाढ़े चार बजे खत्म हुई।

अध्यक्ष महोदय, उसके बाद साक्षीजी महाराज के बारे में कहा गया। मैं इस बात को नहीं कहना चाहता क्योंकि यह उससे संबंधित मामला नहीं। मैं केवल यही कहना चाहता हूं कि माननीय गृह मंत्री जी का पत्र मेरे सामने है। मैं और श्री अमर सिंह जी आज से तीन महीने पहले माननीय प्रधानमंत्री जी, गृह मंत्री जी से मिले और उसके बाद फिर दो महीने पहले मिले। एक पत्र भी लिखा है। उसके साथ एक चार्जशीट दी थी जिसमे हमने जिक्र किया था कि दो डी.आई.जी., आई.जी, दोनों इलैक्शन कमिश्नर ने भी डी.एम. और एस.एस.पी. के बारे में लिखा है। ये सारे दस्तावेज़ हमने सुपुर्द कर दिये। इसके बाद २५ जुलाई को राज्य सभा में समाजवादी पार्टी के नेता श्री राम गोपाल यादव ने सवाल उठाया तथा गृह मंत्री जी को ज्ञापन भी दिया। उसके बाद गृह मंत्री जी ने २८ जुलाई को उत्तर दिया:

“प्रिय यादव जी,

उत्तर प्रदेश के एटा जिले के जिलाधिकारी एवं वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक द्वारा की जारी कथित अनियमितताओं एवं अनैतिक कार्यों की जांच कराये जाने के संबंध में आपका दिनांक २५ जुलाई, २००० का पत्र मिला। मैं इस मामले की जांच करवा रहा हूं ”

अध्यक्ष महोदय, मैं सदन में माननीय नेताओं का ध्यान आकर्षित करना चाहता हूं कि जो साक्षीजी का मामला है, वह ३१ जुलाई का है।

MR. SPEAKER: Shri Mulayam Singhji, now you have given the privilege notice. I am calling for facts in this regard. It is under my consideration.

श्री मुलायम सिंह यादव : <ºÉÉÊãɪÉä VÉ¤É iÉBÉE cÉ=ºÉ BÉEä ºÉÉàÉxÉä iÉlªÉ xÉcÉÓ +ÉɪÉåMÉä càÉ ºÉä BÉEèºÉä ºÉcªÉÉäMÉ ÉÊàÉãÉäMÉÉ* càÉÉ®É +É{ÉàÉÉxÉ ÉÊBÉEªÉÉ MɪÉÉ, càÉå ºÉ£ÉÉ àÉå VÉÉxÉä ºÉä ®ÉäBÉEÉ MɪÉÉ* ´ÉcÉÆ {ÉÉÒxÉä BÉEä ÉÊãɪÉä {ÉÉxÉÉÒ xÉcÉÓ lÉÉ* +ÉÉ{ÉBÉEÉä ABÉE iɺ´ÉÉÒ® ºÉä {ÉiÉÉ SÉãÉäMÉÉ ÉÊBÉE céb {Éà{É ÉÊBÉEºÉ iÉ®c ÉÊàÉãÉ MɪÉÉ +ÉÉè® càÉ {ÉÉxÉÉÒ ãÉä ºÉBÉEä* càÉÉ®ä ºÉÉÉÊlɪÉÉå +ÉÉè® xÉäiÉÉ ÉÊ´É®ÉävÉÉÒ nãÉ ÉÊ´ÉvÉÉxɺɣÉÉ BÉEÉä |ÉÉä]ÉäBÉEÉäãÉ xÉcÉÓ ÉÊnªÉÉ MɪÉÉ* càÉ ÉÊVÉºÉ BÉEè]äMÉ®ÉÒ ºÉä cé, càÉÉ®É +É{ÉàÉÉxÉ ÉÊBÉEªÉÉ MɪÉÉ +ÉÉè® càÉÉ®ä ÉʴɶÉä­ÉÉÉÊvÉBÉEÉ® BÉEÉ cxÉxÉ ÉÊBÉEªÉÉ MɪÉÉ cè * <ºÉÉÊãɪÉä càÉ àÉÉÆMÉ BÉE®iÉä cé ÉÊBÉE ªÉc àÉÉàÉãÉÉ ÉʴɶÉä­ÉÉÉÊvÉBÉEÉ® ºÉÉÊàÉÉÊiÉ BÉEÉä ºÉÖ{ÉÖnÇ ÉÊBÉEªÉÉ VÉɪÉä* <ºÉBÉEä ºÉÉlÉ cÉÒ càÉ SÉÉciÉä cé ÉÊBÉE ãÉÉäBÉEºÉ£ÉÉ BÉEÉÒ ABÉE BÉEàÉä]ÉÒ ¤ÉxÉä* àÉé ªÉc £ÉÉÒ BÉEcÚÆMÉÉ ÉÊBÉE ºÉƺÉnÉÒªÉ BÉEɪÉÇ àÉÆjÉÉÒ º´ÉªÉÆ +É{ÉxÉä ÉÊBÉEºÉÉÒ ´ÉÉÊ®­~ xÉäiÉÉ BÉEä ºÉÉlÉ ºÉƺÉnÉÒªÉ nãÉ BÉEÉÒ ABÉE BÉEàÉä]ÉÒ ¤ÉxÉÉBÉE® A]É VÉxÉ{Én BÉEä bÉÒ.AàÉ. +ÉÉè® AºÉ.AºÉ.{ÉÉÒ. uÉ®É BÉEÉÒ VÉÉ ®cÉÒ BÉE®iÉÚiÉÉå iÉlÉÉ ÉÊBÉEªÉä VÉÉ ®cä nàÉxÉ BÉEÉÒ VÉÉÆSÉ BÉE®ä* <ºÉàÉå xÉ BÉEä´ÉãÉ càÉÉ®É +É{ÉàÉÉxÉ cÖ+ÉÉ ¤ÉÉÎãBÉE càÉÉ®ä SÉÉ® ºÉÉƺÉn ºÉÉÉÊlɪÉÉå +ÉÉè® AàÉ.AãÉ.AVÉ. BÉEÉ £ÉÉÒ +É{ÉàÉÉxÉ ÉÊBÉEªÉÉ MɪÉÉ cè* <ºÉ iÉ®c ºÉä ÉʴɶÉä­ÉÉÉÊvÉBÉEÉ® BÉEÉ cxÉxÉ ÉÊBÉEªÉÉ MɪÉÉ cè*

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SHRI SOMNATH CHATTERJEE (BOLPUR): Mr. Speaker, Sir, a senior Member of the House and the leader of a party feels that when he went along with other Members of Parliament they have been deliberately insulted in the course of discharge of their functions as Members of Parliament. It is also our duty to relate to the people. There have been instances when Members of Parliament have been insulted by police authorities and others. Their cases have been referred to the Privileges Committee. I would request you to consider favourably the suggestion and the prayer made by Shri Mulayam Singh Yadav. … (Interruptions)

SHRI K. YERRANNAIDU (SRIKAKULAM): Sir, I am also associating myself with what Shri Mulayam Singh Yadav has said. … (Interruptions)

डा.रघुवंश प्रसाद सिंह (वैशाली) : अध्यक्ष महोदय, माननीय नेता श्री मुलायम सिंह जी ने सदन में जो बयान दिया है कि लोकतंत्र बचेगा या नहीं बचेगा। लोकतंत्र में किसी को भी रैली करने का या सभा करने का अधिकार है, लेकिन माननीय नेता और उनके विधायकों को वहां रोककर रखा गया, उनके साथ बदसलूकी की गई। यह सीधा विशेषाधिकार का मामला बनता है। वहां का कलक्टर, एस.पी. या जो भी अधिकारी इसके लिए दोषी हैं, उनका सस्पैन्शन होना चाहिए और उसके खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए, जिससे कि लोकतंत्र बच सके।…( व्यवधान)

MR. SPEAKER: Nothing should go on record now.(Interruptions)*

MR. SPEAKER: The matter raised by Shri Mulayam Singh Yadav is under my consideration.… (Interruptions)

SHRI MADHAVRAO SCINDIA (GUNA): Mr. Speaker, I think, Shri Mulayam Singh Yadav has raised a subject that affects the rights of all elected Members of Parliament – not just on the Opposition benches but also in the Treasury benches.

__________________________________________________________________

*Not Recorded.

All of us, including those from the Treasury benches, involve ourselves in rallies and demonstrations in our States and in our constituencies. I think, if there is any truth in this, which there must be because Shri Mulayam Singh Yadav has said it, this should be looked into. What is the harm in referring it to the Privileges Committee? Let the Privileges Committee look into it and let them come to some conclusions. I think, it is a matter affecting everyone sitting here.


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