>
Title: Regarding need to collect population data of SCs, STs and OBCs in ongoing census in the country.
श्रीमती सुषमा स्वराज (विदिशा): उपाध्यक्ष जी, आज सुबह से ही सदन में जनगणना का मुद्दा उठाया जा रहा है। आपकी जानकारी में होगा कि इस विषय पर नियम 193 के अंतर्गत चर्चा की जाये, इसके लिये मैंने नोटिस दिया हुआ है। इसके अलावा मेरे अन्य साथियों में श्री मुलायम सिंह यादव की पार्टी की तरफ से भी नोटिस दिया हुआ है। लालू यादव जी की पार्टी की तरफ से भी दिया गया है। सब पार्टियों की तरफ से दिया गया है। जनगणना का इतना बड़ा कार्य देश में हो रहा है। इतनी बड़ी कवायद हो रही है, इतनी बड़ी एक्सरसाइज हो रही है कि 25 लाख लोग इस कार्य को कराने के लिये छांटे गये हैं। यह एक ऐसा प्रसंग है जिससे सूत्र पकड़कर हम इस देश के गरीबों का प्रामाणिक आंकड़ा इकट्ठा कर सकते हैं, पिछड़ों का प्रमाणिक आंकड़ा इकट्ठा कर सकते हैं। हम आज खाद्य सुरक्षा कानून की बात करते हैं कि कितने लोगों के लिये खाद्य सुरक्षा जुटानी है, उसका प्रामाणिक आंकड़ा इकट्ठा कर सकते हैं। जिन लोगों के लिये आरक्षण की व्यवस्था की जाती है, वह आज तक अंदाजों के आधार पर हो रहा है, उसका प्रामाणिक आंकड़ा हम लोग इकट्ठा कर सकते हैं। लेकिन मुझे दुख के साथ कहना पड़ता है कि इतनी बड़ी एक्सरसाईज होने के लिए फॉर्म में कोई कॉलम ऐसा नहीं बना जिससे यह आंकड़ा इकट्ठा किया जा सके। इसलिये बहुत महत्वपूर्ण मुद्दे इस जनगणना से संबंधित उभरे हैं बल्कि एक ऐसा कॉलम लगा दिया गया है कि जो आदमी घोषित कर दे, वह राष्ट्रीयता इसमें लिख दी जाये। इसमें घुसपैठियों को भी भारतीय लिखने का मौका आप दे रहे हैं। इसलिये मेंरा आपके माध्यम से सरकार से अनुरोध है कि हमने जो चर्चा नियम 193 के अधीन मांगी है, उसे कल ले लिया जाये ताकि यह मुद्दा जो सुबह से उठ रहा है, उसका संतोषजनक समाधान हो सके और हम सब अपनी बात विस्तृत रूप से सदन में रख सकें, उसके बाद सरकार उत्तर देकर हमारा समाधान करे, यही मुझे आपसे निवेदन करना है।
श्री मुलायम सिंह यादव (मैनपुरी): उपाध्यक्ष जी, आप का बहुत बहुत धन्यवाद। जनगणना को लेकर हम सुबह से मामला उठा रहे हैं। हमारी मांग है कि यह जनगणना जाति के आधार पर हो। इसमें सरकार को क्या आपत्ति है? जब जनगणना होगी तो लोग घर घर जायेंगे, गांव गांव में जायेंगे, दरवाजे दरवाजे जायेंगे तो फार्म में एक ऐसा कालम हो जिसमें जाति हो। मैं यह इसलिये कह रहा हूं कि जब काका कालेलकर कमीशन बैठा, तो जनगणना के आंकड़े न होने के कारण उन्हें कठिनाई आई। जब मंडल आयोग बैठा तो भी जनगणना आंकडे न होने के कारण उन्हें बहुत परेशानी हुई। जब ओबीसी को आरक्षण नहीं दिया गया, तब सर्वोच्च न्यायालय ने इन्दिरा साहनी मामले में भी वहां पर चिन्ता जाहिर की तो सुप्रीम कोर्ट को भी परेशानी आयी। अभी हाल ही में सर्वोच्च न्यायालय में एक और मामला आया तो जनगणना का आंकड़ा न होने के कारण परेशानी हुई। जब सुप्रीम कोर्ट में परेशानी आयी, जब दो कमीशन बैठे. परेशानी आयी, जब ओबीसी के आरक्षण से संबंधित परेशानी आयी, मुझे पता नहीं कि सरकार किस बात के लिये परेशानी है? 1931 में जाति के आधार पर जनगणना हुई थी। मेरे सामने भी उत्तर प्रदेश में आयी जब पंचायत के चुनाव कराये गये। लेकिन हमने जनगणना करायी,वह जनगणना कितनी सही और कितनी गलत थी लेकिन जल्दबाजी में हुई। केन्द्र सरकार की इतनी बड़ी मशीनरी है, राज्य सरकार की इतनी बड़ी मशीनरी है तब जाति के आधार पर जनगणना कराने में क्या परेशानी है? यह क्यों छिपाया जा रहा है, क्यों उनका हिस्सा मारा जा रहा है? अब तो जनसंख्या बढ़ गई है। वर्ष 1980 से कुछ जातियों की जनसंख्या बढ़ गई है और उसे आरक्षण जाति के आधार पर पूरा नहीं मिल रहा है । इसलिये मेरी सरकार से मांग है कि जनगणना हो, उसमें जाति का एक कॉलम लिखा हो ताकि उसके आधार पर जनगणना हो।
उपाध्यक्ष महोदय : आप लोग इसे डिबेट मत बनाइये। काफी लोगों ने बोल दिया है, अब सरकार कुछ जवाब देगी।
SHRI GURUDAS DASGUPTA (GHATAL): We should be allowed to make our point. That is the practice here in this House on such an important issue. Please allow us to speak.
श्री शरद यादव (मधेपुरा):महोदय, अभी नेता विपक्ष सुषमा जी ने और भाई मुलायम सिंह जी ने जो कहा, उसे मैं दोहराना नहीं चाहता हूं। मैं निवेदन करना चाहता हूं कि हिन्दुस्तान में दो तबके ऐसे हैं, जो हर तरह से सताये जा रहे हैं। एक हिन्दुस्तान का ट्राइबल या आदिवासी है और दूसरा बैकवर्ड क्लासेस का तबका है। जब कल बहस होगी तो उसमें सारे तथ्य सामने आ जायेंगे। मैं आपसे कहना चाहता हूं कि सरकार इसमें हिचक क्यों कर रही है? इस देश में नदी कितनी हैं, नाले कितने हैं, खेत कितने हैं, पेड़ कितने हैं, जानवर कितने हैं, बाघ कितने हैं, मोर कितने हैं, सबकी जनसंख्या हो रही है। इस देश में जाति हकीकत है। हम सब चीज वापस कर लेंगे, जाति तोड़ने का कोई रास्ता बना दीजिए। जाति है और जाति की हकीकत है, यह सारी चीजों में काम कर रही है। यह सरकार इतनी चालाकी से इस काम को कर रही है, यह सही बात कही गयी कि कोई आदमी कहीं से आया, वह किसी भी जगह से आया, लेकिन अपने को वह इस देश का नागरिक लिख देगा, उस पर इन्हें कोई ऐतराज नहीं है। इस देश में जो सदियों से भुगत रहे हैं, ट्राइबल और पिछड़ी जाति के लोगों का तो बहुत बुरा हाल है, लेकिन कोई उनकी बात सुनने को तैयार नहीं है। आप यह बताइये कि आप बजट में एलोकेशन कर रहे हैं, आप वजीफा दे रहे हैं।…( व्यवधान)
उपाध्यक्ष महोदय : कृपया संक्षेप में बोलिये।
SHRI T.R. BAALU (SRIPERUMBUDUR): You have to hear everybody. This is a most important issue for everybody. It is for the Chair to decide. You have to hear everybody.
THE MINISTER OF PARLIAMENTARY AFFAIRS AND MINISTER OF WATER RESOURCES (SHRI PAWAN KUMAR BANSAL): Certainly, it is an important matter. If the hon. Members wish to speak right now, let them speak right now, the reply will be given day after. If every Member wants to speak, then it will be very difficult. My suggestion is, as the Leader of Opposition said … (Interruptions) यह क्या है?…( व्यवधान)
श्री शरद यादव : महोदय, मेरा इतना ही कहना है कि यह ऐसा अन्याय है, जो इस देश की बहुसंख्यक आबादी के साथ हो रहा है।
उपाध्यक्ष महोदय : आप क्या कहना चाहते हैं?
श्री शरद यादव : महोदय, मैं चाहता हूं कि इस पर कल जो चर्चा हो, सरकार उस पर जवाब दे। सरकार का जवाब सगुण होना चाहिए। वह जवाब बिल्कुल ठोस और ठीक होना चाहिए। जनगणना नहीं होगी, तो सदन चलाना आपके लिए बहुत मुश्किल होगा, बहुत कठिन होगा।
श्री लालू प्रसाद (सारण):महोदय, हमने इस सवाल को सबसे पहले शून्य काल में उठाया था। आज पूरा सदन, चाहे बीजेपी हो, जद(यू) हो, कांग्रेस पार्टी के लोग हों, एस.पी. के नेता श्री मुलायम सिंह यादव जी, बीएसपी, सभी इस बारे में कह रहे हैं। वर्ष 1931 तक जनगणना जातीय आधार पर हुयी। रिकार्ड्स आफ राइट्स, जो गांव में जातियों के लिए रखे हुए हैं और जाति ही यथार्थ है। हम लोग कोई रिजर्वेशन नहीं मांग रहे हैं, हम यहां पर कोई बैकवर्ड या फॉरवर्ड की लड़ाई नहीं लड़ रहे हैं। आप लड़कों, बच्चों को सेवाओं में जाने के लिए जाति प्रमाण-पत्र देते हैं। जाति है, रिकार्ड्स ऑफ राइट्स में भी है और जब भी कोई दबे, कुचले, पिछड़े वर्गो का सवाल उठता है, शैडय़ूल कास्ट, शैडय़ूल ट्राइब की भी जनसंख्या वर्ष 1931 के बाद बढ़ी है। आज हम इस देश में अंदाज पर काम कर रहे हैं। मुझे मालूम है, मुझे बताया गया है कि मौजूदा होम मिनिस्टर ने लिखा था कि …( व्यवधान)
उपाध्यक्ष महोदय : आप संक्षेप में अपनी बात कहिए।
श्री लालू प्रसाद : होम डिपार्टमेंट को, उसके मंत्री को कि सेन्सस जातीय आधार पर कराइये, लेकिन पता नहीं किस कारण से इन्हें चिट्ठी वापस लेनी पड़ी? हमारे दल की और हमारी पुरजोर मांग है कि आप पूरे देश में जनगणना जातीय आधार पर कराइये और आप अंडर ब्रैकिट कास्ट भी लिखिये। कास्ट तो है, रिकार्ड्स ऑफ राइट्स में है, सब जगह है, ताकि लोगों को मालूम हो जाये कि हमारी संख्या क्या है?
जाति हकीकत है, ऐसा ठीक कहा शरद यादव जी ने, और इससे इंकार नहीं किया जा सकता। इसमें तकलीफ़ किस बात की है? क्यों नहीं आप आगे आ रहे हैं? इसलिए चर्चा हो या चर्चा नहीं हो, आज जिस तरह से हाउस स्टाल हुआ, मगर कल जब भी चर्चा हो, सरकार स्पष्ट रूप से यह उत्तर दे कि हम देश के सभी वर्गों की जनगणना जातीय आधार पर कराएँगे। पिछड़े वर्गों की, शैडय़ूल्ड कास्ट्स की, शैडय़ूल्ड ट्राइब्ज़ की जाति ब्रैकेट में लिखिये। ऊँची जाति भी लिखिये, हमें कोई एतराज़ नहीं है। लिखिये और यह फिगर आना चाहिए। आइना जब आपके सामने रहेगा तो आपको जो भी आगे काम करना है, उसमें सहूलियत होगी। इसलिए लाल कपड़ा देखकर आप भड़किये मत। इसको आपको करना पड़ेगा और कल उत्तर देना पड़ेगा। आज तो नेता विरोधी दल और सबसे बात हुई कि ठीक है कल चर्चा हो जाए और चर्चा के बाद यदि संतोषजनक उत्तर नहीं आएगा तो फिर हम सब लोगों को परेशानी होगी और आप सब लोगों को उस परेशानी को लगातार झेलना ही है। जनगणना बिल्कुल जातीय आधार पर हो, मैं लगातार इस सवाल को उठा रहा हूँ।
उपाध्यक्ष महोदय : कल जब बात होगी तो भाषण में बोलियेगा।
श्री लालू प्रसाद : कल होगा तो भाषण कल करेंगे। हम सरकार को बोल रहे हैं, आपको थोड़े ही बोल रहे हैं। आपके माध्यम से सरकार को बता रहे हैं। …( व्यवधान)
MR. DEPUTY-SPEAKER: Tomorrow, you are going to have the debate. You can explain your viewpoints.
श्री पवन कुमार बंसल: महोदय, यही बात कल कहना चाहते हैं, यही बात आज कह रहे हैं। मैं उसके लिए जवाब दे देना चाहता हूँ। …( व्यवधान)
उपाध्यक्ष महोदय : मंत्री जी बोल रहे हैं कि कल यह बहस होगी तो आप सभी लोग बोलेंगे और आज ही अगर सब बोल लेंगे तो फिर कल क्या बात करेंगे?
…( व्यवधान)
श्री पवन कुमार बंसल : महोदय, मैं यह कहना चाहता हूँ जो मैं सुबह भी कहना चाह रहा था लेकिन सुबह जो हालात हाउस में थे उसके कारण बात नहीं कह पाया। सरकार इस पर बहस के लिए तैयार है। …( व्यवधान) सरकार चाहती है कि विस्तृत ढंग से इस पर बहस हो जाए और चर्चा हो। मैं यह अदब ज़रूर करना चाहता हूँ कि अगर कल जवाब नहीं दे पाए तो परसों इस पर जवाब ज़रूर दे दिया जाएगा। कल इस पर चर्चा हो जाए। …( व्यवधान)
श्री दारा सिंह चौहान : सरकार इस पर विचार करती तो ऐसी स्थिति क्यों पैदा होती? …( व्यवधान)
श्री पवन कुमार बंसल : मैंने कह दिया है, आगे आपकी मर्ज़ी है। सरकार इस पर बहस के लिए तैयार है। आगे आपने हाउस का संचालन करना है। आप जो चाहते हैं करते रहिये। …( व्यवधान)
उपाध्यक्ष महोदय : एक मिनट सुन लीजिए। बहुत लंबी बात न कहें।
श्री दारा सिंह चौहान : लंबा नहीं, हम संक्षेप में बोलेंगे। …( व्यवधान)
उपाध्यक्ष महोदय : आप सुन तो लीजिए। आप इस विषय से संबद्ध हो जाइए। बात खत्म कर दीजिए।
…( व्यवधान)
श्री दारा सिंह चौहान : उपाध्यक्ष महोदय, यह बहुत ही महत्वपूर्ण मामला है। आज पूरे देश में जो इतना बड़ा समाज है – एस.सी. है, एस.टी. है और ओबीसी है, आज इस बात को लेकर चिन्तित है कि जब इस देश में पेड़ों की जनगणना हो रही है, पौधों की हो रही है, पोखरों और तालाब की हो रही है, बाघ की हो रही है, जानवरों की हो रही है तो इस देश में रहने वाले इतने इंसान क्या जानवरों से भी पीछे हैं? क्या उनकी गिनती नहीं हो सकती है? यह सही है कि इस देश में जाति सच्चाई है। जब जाति के आधार पर लोगों की पहचान है, जाति के आधार पर आरक्षण का मौका मिलता है तो जाति की जनगणना क्यों नहीं हो सकती।…( व्यवधान)
उपाध्यक्ष महोदय : आप संक्षेप में बोलिये।
श्री दारा सिंह चौहान : 1931 के बाद आज जब पार्लियामैंट में सवाल पैदा होता है तो तमाम प्रदेश की सरकारों ने बीपीएल सूची को बढ़ाने की मांग की है लेकिन केन्द्र सरकार के पास इतने कमीशन की रिपोर्ट आने के बाद भी आज इस देश में कितने गरीब लोग हैं, इसकी संख्या इनके पास नहीं है। …( व्यवधान)
उपाध्यक्ष महोदय : विस्तार से कल बोलिये। आज सिर्फ इतना बोलिये कि जो बात रखी गई है, उससे आप संबद्ध होते हैं।
श्री दारा सिंह चौहान : सुप्रीम कोर्ट ने कमैन्ट किया था कि जब आपके पास जातीय आधार पर कोई जनगणना नहीं है तो फिर आरक्षण किस बात का दिया जाए। मैं बता दूँ कि हमारी बहुजन समाज पार्टी शुरू से कहती रही है कि जिसकी जितनी संख्या भारी, उसकी उतनी हिस्सेदारी। समाज में हर क्षेत्र में जो गैर-बराबरी है, उस आधार पर हम यह चाहते हैं। इसलिए इस पर विस्तार से चर्चा कराई जाए।
SHRI T.K.S. ELANGOVAN (CHENNAI NORTH): Mr. Deputy-Speaker, Sir, we also want to support the issue of having census on the basis of caste. That does not mean we are supporting the caste system, but we will know the class – the OBCs, SCs and STs – only by a system which will have caste also as a part of the census. So, we support the demand.
SHRI GURUDAS DASGUPTA : Sir, I think this is a very sensitive issue. We are having a discussion tomorrow and that is good. But by merely having a discussion in the House you cannot reach a consensus. I think the Government should call a meeting of all parties and decide this issue. I support the demand that OBCs, SCs, STs should find their identity in the census. But there should be an all-Party meeting.
DR. M. THAMBIDURAI (KARUR): Sir, whatever the hon. Member has said, I support it. We have to have a thorough discussion on this matter. I support this demand.
SHRI BASU DEB ACHARIA (BANKURA): Sir, we are again dividing the society on the basis of caste. We are for class. We will achieve a classless society one day. Those castes which belong to OBC category have already been determined. When census of Scheduled Castes and Scheduled Tribes is being done, why cannot it be done for OBCs? So, information in regard to OBC should also be collected by the census. I want to make it clear that caste should not be the basis. In West Bengal Government there is a Department of Backward Classes Welfare. The society should not be divided on the basis of caste.
श्री आनंदराव अडसुल (अमरावती):उपाध्यक्ष महोदय, नेता प्रतिपक्ष एवं अन्य नेतागण ने जाति की जनगणना के बारे में यहां सवाल उठाया है। मैं यह कहना चाहता हूं कि जातियों के साथ उपजातियां भी हैं, जिनके सामने वैलिडिटी का सवाल पैदा होता है। मेरे चुनाव क्षेत्र अमरावती और यवतमाल में पांच हजार लोगों को सर्टिफिकेट नहीं मिला है। जाति और उपजाति की जनगणना के साथ वैलिडिटी का प्रबन्ध भी होना चाहिए। यही मेरा सुझाव है।
*DR. RATTAN SINGH AJNALA (KHADOOR SAHIB): Hon. Deputy Sir, I urge upon the Government to have a separate census of other backward class during the census that is going on.
श्री नामा नागेश्वर राव (खम्माम):उपाध्यक्ष महोदय, हर पार्टी को बोलने दिया गया है, हमें भी बोलने का मौका दिया जाना चाहिए…( व्यवधान)
उपाध्यक्ष महोदय : इस पर काफी बातें आ चुकी हैं। मंत्री जी ने कहा है कि कल इस पर बहस होगी। आज तो इस पर बहस नहीं करनी है।
…( व्यवधान)