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Title : Regarding need to ensure that persons who migrated from Pakistan in 1947 and settled in J & K get the domicile of the State.
श्री गिरधारी लाल भार्गव (जयपुर) : १९४७ में देश को आजादी मिलने के साथ ही देश का विभाजन भी हुआ। वहां से हजारों हिंदू परिवारों ने अपनी समस्त चल-अचल सम्पत्ति छोड़ जम्मू व कश्मीर में शरण ली। जम्मू-कश्मीर में बसे इन लोगों को भारत की नागरिकता तो मिली जिससे ये लोक सभा चुनावों में तो मतदान कर सकते हैं, परंतु जम्मू-कश्मीर की नागरिकता आज तक नहीं मिली, जिससे ये लोग जम्मू-कश्मीर विधान सभा चुनावों में मतदान नहीं कर सकते।
इसके साथ ही वे जम्मू-कश्मीर की नागरिकता से भी वंचित हैं। इस कारण वे राज्य सरकार में सरकारी नौकरी, सरकारी स्कूलों, मेडिकल व इंजीनियरिंग कालेजों, शिक्षा व ऋण सुविधाओं का लाभ लेने से भी वंचित हैं। ये देश की आजादी के ५८ वर्ष बाद भी दयनीय जीवन जीने को मजबूर हैं।
मेरा केन्द्रीय सरकार से अनुरोध है कि शीघ्र ही इस समस्या का समाधान करें।
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