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Regarding Problems Faced By Farmers And Landless Labourers. on 20 August, 2007

Lok Sabha Debates
Regarding Problems Faced By Farmers And Landless Labourers. on 20 August, 2007


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Title: Regarding problems faced by Farmers and Landless Labourers.

 

 

MR. SPEAKER: Item No. 14, we will take it up later. Now, we will take up matters of urgent public importance. Dr. Satyanarayan Jatiya.

… (Interruptions)

MR. SPEAKER: Dr. Jatiya, I am told that a large number of farmers have come to Delhi. In view of that, I am allowing you to mention it, although there was a full-fledged discussion on the farmers’ issue. Therefore, mention only the important thing. You will have ample time to discuss the issue, and that is my earnest request to you.

… (Interruptions)

डा. सत्यनारायण जटिया (उज्जैन):अध्यक्ष महोदय, राजनाथ सिंह जी के नेतृत्व में देश भर के सारे किसान अपनी समस्याओं के बारे में केन्द्र सरकार का ध्यान आकर्षित करने के लिए आज रामलीला मैदान में आए हैं। 

लाखों की संख्या में किसान आये हुए हैं जिनकी समस्याओं की तरफ सरकार को ध्यान देना चाहिये। सरकार किसानों के लिये , जो समर्थन मूल्य तय करती है, उससे किसानों का गुजारा नहीं होता है। सरकार को चाहिये कि वह किसानों को लाभकारी मूल्य दे। सरकार इसके लिये सुनिश्चित उपाय करे। अभी बाढ़, भीषण वर्षा से किसानों की फसलों को नुकसान हुआ है । सरकार को अनुदान राशि की घोषणा करनी चाहिये। आज अपनी बेबसी के कारण हजारों की संख्या में किसान कर्ज न चुकाने की स्थिति में आत्महत्यायें कर रहे हैं। इस कष्टप्रद स्थिति को देखते हुये सरकार को स्पष्ट रूप से सामने आना चाहिये कि जिस तरह अल्पसंख्यकों  या अन्य योजनाओं में बाकी लोगों के लिये बिना ब्याज के ऋण देने वाली है, किसानों को भी यह सुविधा मिलनीऔर ो क्योंकि खेतिहर मजदूरों को भी राहत भत्ता बेरोजगारी की स्थिति में देना चाहिए। मेरी मांग है कि किसानों को बिना ब्याज के ऋण मुहैय्या कराया जाये। आज किसान रामलीला मैदान में आये हुये हैं। सरकार को उनकी समस्याओं पर ध्यान देना चाहिये। ”कौन बनाता हिन्दुस्तान, भारत का मजदूर किसान ”  देश की 70 प्रतिशत आबादी खेती पर निर्भर है। देश की कृषि क्षेत्र में जीडीपी को बढ़ाने के लिये आवश्यक है कि सरकार देश के किसानों और कृषि की समस्याओं की ओर  ध्यान दे।

अध्यक्ष महोदय :  आपने इस मामले को अच्छे ढंग से उठाया है।

श्री संतोष गंगवार (बरेली): अध्यक्ष महोदय, जैसा डा. जटिया ने बताया कि देश के कोने-कोने से  लाखों किसान यहां आये हुये हैं लेकिन दुर्भाग्य है कि किसानों द्वारा की जाने वाली आत्महत्याओं का दौर बढ़ रहा है। पिछले 8 वर्षों में डेढ़ लाख किसानों द्वारा आत्महत्यायें की गई हैं लेकिन सरकार इस ओर ध्यान नहीं दे रही है। आज ही प्रश्नकाल में माननीय मंत्री जी ने एक प्रश्न के उत्तर में बताया कि सरकार गेहूं का आयात कर रही है जो हमें 1400 रुपये क्विंटल के भाव पड़ेगा और यदि किसानों को 850-900-1000 रुपये गेहूं का भाव मिलेगा तो यह सौगात है। इसके अलावा मंत्री जी ने स्वीकार किया है कि साढ़े चार हजार करोड़ रुपया गन्ना किसानों का बकाया देना है। इसके अलावा यदि किसानों की बैंकों से दो किश्तें छूट  जायें तो उन्हें जेल जाना पड़ता है…( व्यवधान)

MR. SPEAKER: We will have a full discussion on this.

श्री संतोष गंगवार : आज सरकार कॉरपोरेट फॉर्मिंग की ओर ध्यान दे रही है। सरकार ने कहा था कि कृषि विकास दर 4 प्रतिशत पर ले आयेंगे लेकिन आज की तारीख में  यह 1.2 प्रतिशत है। आज कृषि मंत्री जी ने स्वीकार किया है कि  देश में 82 प्रतिशत किसान ढाई एकड़ से कम जमीन वाले हैं। लगता है कि सरकार ने तय कर लिया है कि  सारे किसान खत्म कर देने हैं और देश में कॉरपोरेट फॉर्मिंग के माध्यम से केवल 4 से 6 प्रतिशत लोगों को जमने का अवसर दे रही है। सरकार ने किसानों को पैकेज देने के लिये देश के विभिन्न राज्यों के केवल 31 जिले तय किये हैं…( व्यवधान)

श्री हन्नान मोल्लाह (उलूबेरिया)  : अध्यक्ष जी, हमने भी नोटिस दिया है।

अध्यक्ष महोदय :  मेहरबानी करके आप लोग सहयोग कीजिये। अगर आपने नोटिस दिया है, लेकिन आप नोटिस क्या देते हैं, फिर बोलते क्या हैं? हमने आपका नोटिस एडमिट किया है लेकिन क्या हम वहां से बोलेंगे?

श्री संतोष गंगवार : किसानों को पैकेज देने के लिये देश के केवल 31 जिले तय किये गये हैं जबकि देश में ऐसे जिलों की संख्या 167 है…( व्यवधान)

MR. SPEAKER: Do not exhaust all your points now.

श्री संतोष गंगवार :  क्या देश के 31 जिलों के किसान गरीब हैं, बाकी जिलों की सरकार को चिन्ता नहीं है? मेरा अनुरोध है कि देश में जो किसान हैं, उनकी खेती पर लोग निर्भर हैं…( व्यवधान)

MR. SPEAKER: There are many other matters to be taken up.

श्री संतोष गंगवार : क्या सरकार की यह कोशिश है कि देश से किसान खत्म हो जायें? आज लाखों की संख्या में किसान यहां आये हुये हैं। सरकार इस विषय को तय करे कि हमारी कृषि नीति क्या होगी और वे किस हिसाब से गांव में आगे बढ़ सकेंगे?

SHRI BRAJA KISHORE TRIPATHY (PURI): Mr. Speaker, Sir, on behalf of my Party, I would like to associate myself with these issues raised by Dr. Satyanarayan Jatiya and Shri Santosh Gangwar.[s24] 

12.50 hrs.