Title: Regarding slanderous remarks against Vir Savarkar.
(रत्नागरि) :अध्यक्ष महोदय, महान् क्रान्तिकारी वीर सावरकर जी के अपमान के संबंध में हम लगातार सदन में मामला उठाते रहे हैं और सरकार की ओर से आज २.०० बजे सदन में वक्तव्य देने का आदेश आसन की तरफ से दिया गया था, लेकिन अभी तक इस संबंध में कोई सूचना नहीं है।
MR. SPEAKER: The hon. Leader of the House would like to say something.
THE MINISTER OF DEFENCE (SHRI PRANAB MUKHERJEE): Sir, so far as this matter is concerned, as I mentioned, my commitment was to first ascertain the facts after the matter was mentioned by Mr. Geete on the very first day. The next day, that means yesterday, I shared the information which I could collect and from that information, what we find is, though the Petroleum Minister is the ex-officio Chairman of the Indian Oil Foundation which raised the structure and which took the decision, the Union Cabinet is not directly involved in it. Even the earlier decision was taken by the Board of Trustees. Government was not involved. This decision is also being taken by the Board of Trustees. Therefore, I am really at a loss to know how the Government of India could respond to it simply because of the fact that the Minister is the ex-officio Chairman of a Board of Trustees.
In this connection, I must point out most respectfully that the Prime Minister is the Chancellor of the Vishwa Bharati University. But he does not explain his conduct on whatever action he takes where he is doing so in the capacity of the Chancellor so far as this House is concerned. So far as this House is concerned, the issues related with the official function of the individual is concerned with this House. I said whatever I had to say. I do not know what additional information I can share with the Opposition Leaders. If they indicate what type of information they ask for from the Government, I would collect it and share it with them.
MR. SPEAKER: Mr. Advani, Leader of the Opposition, wants to say something.
श्री लाल कृष्ण आडवाणी (गांधीनगर) : अध्यक्ष जी, सदन के नेता ह्ल( व्यवधान)
रेल मंत्री (श्री लालू प्रसाद) : अध्यक्ष महोदय,…( व्यवधान)
अध्यक्ष महोदय : लालू प्रसाद जी, मैंने आडवाणी जी को बोलने के लिए कह दिया है। मैं आपको भी मौका दूंगा।
श्री लालू प्रसाद : सर, माननीय आडवाणी जी के बोलने से पहले हम अर्ज़ करना चाहते हैं कि क्वश्चन-ऑवर में श्री मणि शंकर अय्यर यहां बैठे थे। पेट्रोलियम मनिस्टर को यहां एक्यूज्ड किया गया, उन्हें अलैज किया गया है। …( व्यवधान)
श्री सुशील कुमार मोदी (भागलपुर) : अध्यक्ष महोदय, आपने माननीय विपक्ष के नेता का नाम बोलने के लिए पुकारा है। वे बोलने के लिए खड़े हुए और बीच में लालू जी बोल रहे हैं। …( व्यवधान)
अध्यक्ष महोदय : लालू जी, ठीक है। आप जानते हैं। आप बैठिए। मैं आपको बोलने का मौका दूंगा। आडवाणी जी, आप बोलिए।
… (Interruptions)
MR. SPEAKER: I have called him to speak. Please sit down.
… (Interruptions)
MR. SPEAKER: That is for him to decide.
… (Interruptions)
MR. SPEAKER: Do not show fingers.
… (Interruptions)
: अध्यक्ष जी, यह मामला दो-तीन दिन से चल रहा है और इश्यू है एक क्रान्तिकारी, जिसका सारे देश में बहुत सम्मान है। ऐसे वीर सावरकर का अपमान हुआ है। मैं अभी-अभी सदन के माननीय नेता को सुन रहा था और उन्हें सुनकर मुझे बहुत आश्चर्य हुआ। उसकी तुलना की गई, कोई प्रधान मंत्री अगर यूनिवर्सिटी का चांसलर है तो वह अपमान की बात कभी नहीं करेंगे। यह कोई सवाल ही नहीं है, लेकिन अगर कोई होता है तो सवाल उठ सकता है। दूसरी बात यह है कि केबिनेट बहुत कम ही मामलों में आती है, अधिकांश निर्णय मंत्री के होते हैं और उस मंत्री के निर्णय सब सरकार के माने जाते हैं, कोई व्यक्तिगत निर्णय नहीं माने जाते हैं। मैं समझता हूं कि इस मामले में पहले जो मंत्री थे, उन्होंने एक निर्णय किया और उस निर्णय के अनुसार वहां एक स्थापना हुई। उस स्कलप्टर में कुछ बनाया, उसमें से अब जो मंत्री आए, उन्होंने एक हिस्सा हटा कर उसके स्थान पर दूसरा लगाया। अगर किसी ने उसमें महात्मा जी का लगाया तो किसी को उसमें आपत्ति नहीं है, लेकिन सावरकर जी का वहां से हटाने पर आपत्ति है और उस कारण देश भर में बहुत बड़ी बेचैनी खड़ी हुई है।…( व्यवधान)
MR. SPEAKER: Leader of the Opposition is speaking. Please listen to him.
श्री लाल कृष्ण आडवाणी : मुझे कहा गया कि वह मंत्री आकर व्यक्तिगत रूप से बयान करना चाहते हैं, अपने विचार रखना चाहते हैं, तब मैंने अध्यक्ष जी से निवेदन किया। इस समय सवाल किसी व्यक्ति की व्यक्तिगत इच्छा-अनिच्छा, उसके विचारों का नहीं है। सरकार ने पहले निर्णय किया, मैं गृह मंत्री रहा हूं, यहां श्री शिवराजजी बैठे हैं, आज अंडेमान-निकोबार यूनियन टेरेटरी है। उसमें और यूनियन टेरेटरी में अगर किसी स्थान पर भी कोई स्मारक बनता है तो सरकार की अनुमति के बिना नहीं बन सकता और यह तो सेल्यूलर जेल में बना है। उस जेल में जो कुछ भी होता है, उसके लिए सरकार जिम्मेदार है। सरकार ने एक निर्णय किया और उस निर्णय को बदला गया। यहां यह सवाल उठाया गया कि किस ने यह निर्णय बदला, यह कहना पर्याप्त नहीं है। अगर कोईby virtue of his office चेयरमैन है तो उसकी हर चीज का उत्तर यहां नहीं दिया जाएगा। इस मामले में, सावरकर जी के अपमान के बारे में निश्चित रूप से सरकार को जवाब देना होगा, उसके बिना संतोष नहीं होगा।…( व्यवधान)उन्होंने कई बातें कहीं, वे बातें व्यक्तिगत हुई हैं। उस मंत्री ने जो बातें व्यक्तिगत रूप से कही हैं उनसे हमारा संबंध नहीं है, लेकिन जिन बातों के बारे में सरकार उत्तरदायी है कि सेल्यूलर जेल में अगर कोई स्मारक बनता है तो बिना सरकार की अनुमति के नहीं बन सकता। उसका स्वरूप बदला जाता है तो बिना सरकार की अनुमति के नहीं बदला जा सकता। इस मामले में विपक्ष जानकारी चाहता है।…( व्यवधान)
श्री रघुनाथ झा (बेतिया) : अध्यक्ष महोदय, मैं आपसे विनम्रता पूर्वक एक बात कहना चाहता हूं।…( व्यवधान)
MR. SPEAKER: It is a very sensitive issue.
… ()अध्यक्ष महोदय : इस पर जो-जो बोलना चाहते हैं, उन्हें बोलने दीजिए।
…
श्री रघुनाथ झा : अध्यक्ष महोदय, सदन के नेता और रेल मंत्री, श्री लालू जी ने बुनियादी सवाल को यहां रखा है। महोदय, एक मंत्री के बयान से प्रश्न उठता है और वह मंत्री स्वयं इस सदन में उपस्थित थे तथा वह बयान देना चाहते थे। हम आपसे आग्रह करेंगे, जैसे अभी विरोधी दल के नेता ने कहा और दूसरे दल के साथियों ने कहा कि दो दिनों से वार्ता हो रही है। कल आपके चेम्बर में तय हुआ था कि आज दो बजे माननीय डिफेंस मनिस्टर और सदन के नेता इस पर बयान देंगे, लेकिन ये बयान देने के पहले ही शुरू हो गए और दोनों तरफ से जो परिस्थिति हुई, उसे आप अच्छी तरह जानते हैं। हम आपसे आग्रह एवं निवेदन करेंगे कि श्री मणिशंकर अय्यर जी को सदन में बुलाया जाए, आज नहीं तो कल, जब भी हो और उन्हें कहा जाए कि वे इस पर अपना पर्सनल एक्सप्लनेशन दें। उन पर जो आरोप लगे हैं, उनका जवाब दें और किस परिस्थिति में उन्होंने क्या बोला है, उसका भी जवाब दें तो दूध का दूध और पानी का पानी हो जाएगा।…( व्यवधान)
श्री प्रभुनाथ सिंह (महाराजगंज, बिहार) : अध्यक्ष महोदय, दो-तीन दिनों से चर्चा चल रही है।…( व्यवधान)
एक माननीय सदस्य : चर्चा चलाई जा रही है?…( व्यवधान)
श्री प्रभुनाथ सिंह : हां, चर्चा चल रही है या चलाई जा रही है।…( व्यवधान)
MR. SPEAKER: I request all of you that if you want to say something you can say.
श्री प्रभुनाथ सिंह : अध्यक्ष महोदय, श्री मणिशंकर अय्यर जी इस समय देश के पेट्रोलियम मंत्री हैं, उनके बयान पर चर्चा चल रही है। मुझे नहीं लगता कि जिन लोगों ने देश की आजादी के लिए कुर्बानी दी, उनको सर्टफिकेट देने के लिए लोक सभा में कुछ लोग बैठे हुए हैं, जो उन्हें सर्टफिकेट देना चाहते हैं। उन्होंने देश की आजादी में कुरबानी दी है, कुछ किया है या नहीं किया है। यदि एक सरकार ने तय कर दिया था, जैसा कि आदरणीय आडवाणी जी ने कहा कि अगर किसी का उसमें जोड़ा जाता है तो किसी को आपत्ति नहीं है, लेकिन अगर एक सरकार का निर्णय था तो उसे हटाकर जो एक देश की धरोहर जैसा पुरुष है, ऐतिहासिक पुरुष है, देश का इतिहास रचने में अहम भूमिका निभाने वाले व्यक्ति का इस ढंग से अपमान करना कहीं से उचित नहीं होगा।…( व्यवधान)
आपकी तरह होगा।…( )