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Title : Release of Hafeez Saeed, the mastermind of Mumbai 26/11 terrorist attack, by the Supreme Court of Pakistan.
श्री मुलायम सिंह यादव (मैनपुरी): अध्यक्ष महोदया, मैं आपके सामने कहना चाहता हूं, अभी हाल ही में प्रधानमंत्री जी ने सदन में बयान दिया था, जिसमें उन्होंने कहा था और एक शब्द ऐसा इस्तेमाल किया था कि ट्रस्ट एंड वैरीफाई, वह तो बिट्रे हो गया। हाफिज़ सईद को अब पूरी तरह से अनिश्चित काल के लिए पाकिस्तान ने घूमने का मौका दे दिया और कोई शर्त भी नहीं लगाई।…( व्यवधान) हाफिज़ सईद ही कह रहा है। वह मुम्बई के हमलों का मुख्य साजिशकर्ता था और उसको पाकिस्तान ने छोड़ दिया। माननीय गृह मंत्री जी ने कहा कि हमने पूरे सबूत के साथ पाकिस्तान को मामला भेज दिया है। प्रधानमंत्री जी ने भरोसा भी किया है, लेकिन पाकिस्तान तो बदल गया। सरकार सुप्रीम कोर्ट का बहाना नहीं ले सकती। यह भी सच है कि सुप्रीम कोर्ट में अच्छी पैरवी नहीं की गई और वह आतंकवादी इतना खतरनाक था, जघन्य अपराधी था तो देश को तो फिर खतरा पैदा हो गया है। उसी वक्त सदन में हमने, विपक्ष के पूरे लोगों ने आशंका व्यक्त की थी कि ये हस्ताक्षर करना गलत है, हमने तो यहां तक कहा था कि इसको रद्दी की टोकरी में फेंक दो और पाकिस्तान अभी फिर आपको धोखा देगा। पाकिस्तान के धोखे से देश के लिए फिर खतरा पैदा हो गया है और इससे आतंकवाद को बढ़ावा मिला है।
अब मैं प्रधानमंत्री जी से जानना चाहता हूं कि क्या आपने पाकिस्तान से कोई एतराज किया है, पाकिस्तान से कोई बात हुई है या पाकिस्तान से कहा है कि अगर आप मुकदमा नहीं चला सकते हो तो हमें पकड़कर दीजिए। ऐसी मांग क्यों नहीं की गई? इसलिए हम आपसे कहना चाहते हैं कि अब पाकिस्तान से तो विश्वास आप खो चुके हैं। हम आपसे एक ही बात कहना चाहते हैं कि जो आपने कहा था, ट्रस्ट एंड वेरीफाई, उसका तो पर्दाफाश हो गया, बेनकाब हो गया। अब आपने क्या सोचा है, क्या विचार किया है? देश के सामने सदन मे आपने इतना बड़ा आश्वासन दिया था कि हम पूरी तरह से देश की सुरक्षा को ध्यान में रखेंगे। आपने जो शर्म-अल-शेख में हस्ताक्षर किए, वह गलत हस्ताक्षर थे। अब भी हम कहना चाहते हैं कि हिंदुस्तान को दो टूक जवाब देना चाहिए। हम हिंदुस्तान-पाकिस्तान की एका और दोस्ती के लिए पक्षधर हैं। हमारा तो यहां तक कहना है कि हिंदुस्तान, पाकिस्तान और बंगलादेश का महासंघ बने। हम समाजवादी लोग हैं, जो महासंघ बनाने के पक्षधर हैं । प्रधानमंत्री जी ने जो बयान दिया था, उससे उल्टा हुआ है, इससे देश के स्वाभिमान पर बहुत बड़ी चोट लगी है। देश की जनता को आपने विश्वास दिलाया था, लेकिन अब देश की जनता को आप क्या विश्वास दिलाना चाहते हैं? यह हमारी प्रधानमंत्री जी से मांग है।
माननीय नेता सदन, अगर उनकी तरफ से तत्काल आश्वासन दे सकते हों, तो बतायें। यह कोई मामूली खतरा नहीं है।आतंकवाद को बढ़ावा मिला है, देश को खतरा पैदा हो गया है। अगर मुंबई जैसी दूसरी घटना हो गयी तो उसके लिए जिम्मेदारी सरकार की होगी। इसलिए हम चाहते हैं कि इस सदन में नए सिरे से चर्चा होनी चाहिए। देश की नीति क्या है, देश आतंकवाद को रोकने में कहां पहुंचा है? यह देश के सामने स्पष्ट होना चाहिए। इतना अच्छा मौका मिला था कि पूरी दुनिया में यह साबित हो गया था कि पाकिस्तान आतंकवाद को बढ़ावा देने वाला एक देश है। वह अकेला पड़ गया था। प्रधानमंत्री जी ने सिगनेचर करके पुनः अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर उसको मान्यता दे दी। हिंदुस्तान में सबसे ज्यादा आतंकवाद है। उसके बाद यह कहना, सफाई देना कि पाकिस्तान खुद परेशान है, आपको पाकिस्तान की परेशानी की भी चिंता थी। क्या आपको हिंदुस्तान की चिंता कम है और पाकिस्तान की चिंता ज्यादा है?…( व्यवधान) इसलिए मैं आपसे …( व्यवधान)
अध्यक्ष महोदया : श्री मधु गौड यास्खी।
…( व्यवधान)
श्री अनंत गंगाराम गीते (रायगढ़): अध्यक्ष महोदया, यह मामला जीरो-ऑवर का नहीं है। …( व्यवधान) मुलायम सिंह जी को …( व्यवधान)
अध्यक्ष महोदया : हम आपको भी मौका दे रहे हैं। आपको भी बुला रहे हैं, आपका लिस्ट में नाम है।
…( व्यवधान)
अध्यक्ष महोदया : जब लिस्ट में सभी का नाम है, तो ऐसा क्यों कर रहे हैं? इस तरह से तो किसी की बात नहीं होगी। हम सभी को बारी-बारी ही बुलायेंगे।
…( व्यवधान)
श्री अनंत गंगाराम गीते : अध्यक्ष महोदया, मुलायम सिंह जी ने गंभीर मामला सदन के सामने रखा है।जीरो आवर में जो मामला उठाया गया…( व्यवधान) उसे टालना नहीं चाहिए। …( व्यवधान)
अध्यक्ष महोदया : क्या टालने की बात कह रहे हैं? यह जीरो ऑवर है।
…( व्यवधान)
अध्यक्ष महोदया : आप दूसरे सदस्यों को बोलने दीजिए।
…( व्यवधान)
श्री अनंत गंगाराम गीते : यह देश की सुरक्षा का मामला है। …( व्यवधान)
अध्यक्ष महोदया : कृपया बैठ जाइए।
श्री मधु गौड यास्खी।
…( व्यवधान)
SHRI MADHU GOUD YASKHI (NIZAMABAD): Madam, I would like to raise a matter of urgent public importance… (Interruptions)
अध्यक्ष महोदया : आप बैठ जाइए। आप बिना नाम पुकारे, बोल रहे हैं।
…( व्यवधान)
SHRI MADHU GOUD YASKHI : Madam, today in our country about 48 per cent of the population… (Interruptions)
अध्यक्ष महोदया : आप बैठ जाइए। आपको बुलायेंगे।
…( व्यवधान)
श्री अनंत गंगाराम गीते : इन्होंने जीरो ऑवर में जो मुद्दा उठाया है, उसको नजरंदाज नहीं किया जा सकता।इस पर सदन के नेता को जवाब देना चाहिए। …( व्यवधान)
अध्यक्ष महोदया : हम सरकार को बाध्य नहीं कर सकते। आपने जीरो-ऑवर में मामला उठा लिया। अब शांत हो जाइए।
…( व्यवधान)
MADAM SPEAKER: Nothing will go on record.
(Interruptions) … *
MADAM SPEAKER: Why are you standing? Please sit down.
… (Interruptions)
अध्यक्ष महोदया : श्री मधु गौड यास्खी जी जो बोल रहे हैं, केवल वही रिकार्ड में जाएगा और उसके अलावा कुछ रिकार्ड में नहीं जाएगा।
(Interruptions) … *
SHRI MADHU GOUD YASKHI : Thank you, Madam Speaker for allowing me to raise a matter of urgent public importance… (Interruptions)
अध्यक्ष महोदया : आप शांत हो जाइए।
( व्यवधान)
SHRI MADHU GOUD YASKHI : Madam, today in our country, over 48 per cent of the population are women… (Interruptions)
अध्यक्ष महोदया : शून्य प्रहर चलने दीजिए। आप भी शांत हो जाइए।
…( व्यवधान)
अध्यक्ष महोदया : शून्य प्रहर चलने दीजिए, तभी आपकी बारी आएगी, नहीं तो आपकी बारी ही नहीं आएगी।
( व्यवधान)
* Not recorded
SHRI MADHU GOUD YASKHI : Unfortunately, for the past many years, the atrocities on women have increased… (Interruptions) the violence against women has increased… (Interruptions)
अध्यक्ष महोदया : आपको बुलायेंगे। आप बैठ जाइए। माननीय सदस्य को बोलने दीजिए।
…( व्यवधान)
SHRI MADHU GOUD YASKHI : The dowry deaths, early marriage of girls, sex selected abortions and violence and atrocities have increased for the past decade… (Interruptions)
श्री मुलायम सिंह यादव : अध्यक्ष महोदया, उस मामले का क्या हुआ? …( व्यवधान)
SHRI MADHU GOUD YASKHI : Madam, I would like to draw the attention of the Central Government to take a note of the… (Interruptions)
MADAM SPEAKER: I have your name in the list. I will be calling you.
… (Interruptions)
MADAM SPEAKER: I cannot compel the Government to give the reply during ‘Zero Hour’.
… (Interruptions)
अध्यक्ष महोदया : मधु जी के बाद आपको बुलायेंगे।
…( व्यवधान)
अध्यक्ष महोदया : आप लोग बैठ जाइए।
…( व्यवधान)
MADAM SPEAKER: Please sit down; let me run the House.
… (Interruptions)
श्री लालू प्रसाद (सारण): अध्यक्ष महोदया, वह मुम्बई अटैक्स का मास्टरमाइंड है।…( व्यवधान)
अध्यक्ष महोदया : लालू जी, आप बैठ जाइए।
…( व्यवधान)
श्री यशवंत सिन्हा : अध्यक्ष महोदया, आप इस ईशू पर बोलने का मौका दे दीजिए।…( व्यवधान)
अध्यक्ष महोदया : हम बुला रहे हैं।
…( व्यवधान)
MADAM SPEAKER: Yaskhi ji, I will call you later. यशवंत सिन्हा जी, आप बोलिए।
श्री यशवंत सिन्हा : अध्यक्ष महोदया, बहुत-बहुच धन्यवाद।…( व्यवधान)
MADAM SPEAKER: Let me run the House.
… (Interruptions)
MADAM SPEAKER: Please sit down.
… (Interruptions)
श्री हरिन पाठक (अहमदाबाद पूर्व): चेयर के आदेश का पालन कीजिए। आप सरकार में हैं।…( व्यवधान)
अध्यक्ष महोदया : आप बैठ जाइए। आप क्यों कमैंट कर रहे हैं।
…( व्यवधान)
MADAM SPEAKER: Please sit down; please be quiet.
… (Interruptions)
MADAM SPEAKER: Please address the Chair.
… (Interruptions)
MADAM SPEAKER: You have to sit down when I am standing.
… (Interruptions)
अध्यक्ष महोदया : आप लोग क्यों खड़े हो गए।
…( व्यवधान)
श्री सन्दीप दीक्षित (पूर्वी दिल्ली): अध्यक्ष महोदया ने पहले इन्हें बुलाया था।…( व्यवधान)
अध्यक्ष महोदया : आप लोग चुपचाप बैठिए।
…( व्यवधान)
अध्यक्ष महोदया : मैंने उन्हें बुलाया था लेकिन उनका विषय भिन्न था। इनका विषय एक ही है, इसलिए पहले इन्हें बोलने दीजिए। मैं उन्हें बाद में बुला लूंगी। इतनी सी बात है, इसमें इतना ऐजीटेटेड मत होइए।
…( व्यवधान)
MADAM SPEAKER: It is my decision.
… (Interruptions)
अध्यक्ष महोदया : आप बैठ जाइए।
…( व्यवधान)
अध्यक्ष महोदया : एक ही विषय है, इसलिए मैंने उनकी जगह इन्हें बोलने के लिए कह दिया है। मैं बाद में उन्हें बोलने का समय दे दूंगी।
…( व्यवधान)
अध्यक्ष महोदया : आप कृपया शान्त रहिए।
…( व्यवधान)
अध्यक्ष महोदया : सिन्हा जी, आप बोलिए।
…( व्यवधान)
श्री यशवंत सिन्हा : महोदया, मुलायम सिंह यादव जी ने जो विषय उठाया, मैं उससे अपने को सम्बद्ध करते हुए यह कहना चाहूंगा कि जब इस सदन में प्रधान मंत्री जी की विदेश यात्राओं पर चर्चा हो रही थी, तो मैंने उनसे एक बहुत ही स्पष्ट सवाल पूछा था। वह सवाल यह था कि 16 जून को जब वे राष्ट्रपति ज़रदारी से मिले और 16 जुलाई को जब वे प्रधान मंत्री, श्री गिलानी से मिले, तो इन तीस दिनों में क्या परिवर्तन हुआ कि उन्होंने अपने मैनडेट को बिल्कुल उलट-पुलट कर दिया। प्रधान मंत्री जी ने अपने जवाब में यह कहा था कि इसी बीच उन्हें पाकिस्तान से एक डॉसियर प्राप्त हुआ। उन्होंने उस डॉसियर के बारे में बताया कि उसमें किन आतंकवादियों के नाम थे, पाकिस्तान क्या कार्यवाही करने जा रहा है, उसका उसमें उल्लेख था।
जहां तक मुझे याद है, उस डॉसियर में हाफिज सईद का नाम नहीं था। मुम्बई पर जो हमला हुआ था, सरकार के अऩुसार हाफिज सईद उसका मास्टर माइंड था। चूंकि हाफिज सईद का आईएसआई यानी पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी से सीधे लिंक है, इसलिए उनको हिम्मत नहीं है कि वह हाफिज सईद पर अपना हाथ रख पायें। इसलिए कोई न कोई बहाना बनाकर वह हाफिज सईद को बराबर छोड़ देते हैं। अभी जैसे मुलायम सिंह यादव जी ने कहा कि जो अभियोजन पक्ष था, प्रॉसीक्यूशन था, उसकी कमजोरी के चलते और यह कहकर कि वह आदमी उपलब्ध नहीं है जिसको बहस करनी थी, पाकिस्तान की सुप्रीम कोर्ट ने अनिश्चित काल के लिए हाफिज सईद को रिहा कर दिया। उस पर एक तरह से मुकदमा हट ही गया। इससे पहले 28 जुलाई को पाकिस्तान के गृह मंत्री ने कहा था कि हाफिज सईद के खिलाफ कोई ठोस सबूत नहीं है। अभी हाल ही में हमारे गृह मंत्री ने एक और नया डॉसियर दिया और इस देश की जनता को यह कहा कि उसमें इतने पर्याप्त सबूत हैं कि हाफिज सईद के खिलाफ मुकदमा चल सकता है। उसका जवाब पाकिस्तान ने यह दिया है कि उसने हाफिज सईद को बिल्कुल खुला छोड़ दिया। मेरे पास …( व्यवधान)
अध्यक्ष महोदया : अब आपका समय समाप्त हो गया है।
…( व्यवधान)
अध्यक्ष महोदया : आपको बोलने का समय मिल गया है, इसलिए अब आप अपनी बात समाप्त कीजिए।
…( व्यवधान)
श्री यशवंत सिन्हा : अध्यक्ष महोदया, अभी हमारे प्वाइंट्स ही नहीं आये हैं।…( व्यवधान)
MADAM SPEAER: You had to speak for three minutes only. You have already spoken for three minutes.
… (Interruptions)
श्री यशवंत सिन्हा : अध्यक्ष महोदया, मैं बहुत महत्वपूर्ण मुद्दा उठा रहा हूं कि कल जब यह खबर आई …( व्यवधान) जो ऑपरेटिव पार्ट है, वह तो हुआ ही नहीं। …( व्यवधान) कल जब यह खबर आई, तो विदेश मंत्री जी ने अखबार को बयान दिया।उस अखबार के बयान में उन्होंने कहा कि अब बातचीत का कोई नतीजा नहीं निकलेगा। …( व्यवधान) बातचीत करना फ्युटाइल है। मैं चाहता हूं कि …( व्यवधान)
MADAM SPEAKER: Your time is over.
… (Interruptions)
अध्यक्ष महोदया : आप बैठ जाइये।
… (Interruptions)
MADAM SPEAKER: Yes, Mr. Madhu Goud Yaskhi, you may speak now.
… (Interruptions)
श्रीमती सुषमा स्वराज (विदिशा): महोदया, जो विषय चल रहा है, उसे चलने दें और नेता प्रतिपक्ष बोलना चाहेंगे।
अध्यक्ष महोदया: मैं सदन को बताना चाहती हूं कि इस विषय के बाद शून्य प्रहर में उठाए जाने वाले विषयों के सम्बन्ध में जो अन्य नोटिस मेरे पास आए हैं, उनमें से कुछ माननीय सदस्यों को समय दिया जाएगा। इसलिए वे इसे लेकर चिंतित न हों। अब नेता प्रतिपक्ष बोलेंगे।
श्री लाल कृष्ण आडवाणी (गांधीनगर): अध्यक्ष महोदया, थोड़ी देर पहले हमारे साथी मुलायम सिंह जी ने एक बहुत गम्भीर मसला उठाया था। उस बारे में जो चर्चा हो रही थी, उसका मुख्य बिंदु एक प्रकार से यह था कि पिछले दिनों कई जॉइंट स्टेटमेंट्स आए और उन पर बहस भी हुई। उनमें से एक जॉइंट स्टेटमेंट पर सदन में बहुत से लोग दुखी भी थे। लेकिन कल एक स्टेटमेंट सरकार के विदेश मंत्री जी ने दिया। वह स्टेटमेंट सदन के अंदर नहीं, बाहर दिया गया। उन्होंने जो कुछ कहा है, बहुत से लोग उस बात की पुष्टि करेंगे। आज सदन में हाफिज सईद के मामले को लेकर मुलायम सिंह जी ने यह इश्यू उठाया। आज हम लोगों ने प्रातःकाल टाइम्स ऑफ इंडिया समाचार पत्र में विदेश मंत्रालय की तरफ से दिया गया स्टेटमेंट पढ़ा, जो कि विदेश मंत्री जी ने उस समाचार पत्र को एक्सक्लूसिव इंटरव्यू दिया है। टाइम्स ऑफ इंडिया को दिए उस इंटरव्यू में उन्होंने कहा है,
“We know for a fact that Hafiz Saeed is the mastermind of Mumbai attacks.”
उन्होंने यह बात कही। हम सब अच्छी तरह से जानते हैं कि पिछले साल नवम्बर में जो भयंकर कांड हुआ, जिसे तीन दिन तक सारे देश ने, सारी दुनिया ने देखा। उससे ऐसा लगता था मानो भारत पर हमला हो रहा है। वह सारा का सारा कांड हाफिज सईद ने कराया था, जो लश्करे तैयबा का प्रमुख है और जिसे यू.एन. सिक्योरिटी कौंसिल ने एक टैरेरिस्ट घोषित किया हुआ है। यह सब होने के बाद भी पाकिस्तान सरकार ने उसके खिलाफ जो कार्रवाई थी, उसे खत्म करवा दिया, कोर्ट से भी खत्म करवा दिया। इस पर एस.एम. कृष्णा जी ने कहा,
“Regardless of how many times the PMs or the Foreign Ministers meet or the Foreign Secretaries meet, it will have no impact.”
इसीलिए उन्होंने कहा है कि,
“All talks are futile till Islamabad gives positive indication of tackling terror.”
अब यह सदन जानना चाहेगा कि क्या प्रधान मंत्री जी ने गिलानी के साथ मिलकर जो बयान दिया कि हम टैरर को डी-लिंक करते हैं चर्चा से, हमारे सचिव आपस में मिलेंगे और फिर आगे बढ़ते रहेंगे। विदेश मंत्री जी ने सदन में नहीं, बाहर कहा है, टाइम्स ऑफ इंडिया को अधिकृत रूप से कहा है कि ‘Talks’ का कोई मतलब ही नहीं है। जब तक पाकिस्तान टैरर के खिलाफ कार्रवाई नहीं करता, यह डी-लिंक वाला मामला जो प्रधान मंत्री जी ने कहा था, उसे एक प्रकार से कांट्राडिक्ट करता है। मुझे खुशी है कि कांट्राडिक्ट किया है। अगर उन्होंने सोच-विचार कर स्टेटमेंट दिया है, तो उसकी पुष्टि प्रधान मंत्री जी भी करें तो सही होगा। अध्यक्ष महोदया, आपने आधे घंटे के लिए सदन की बैठक स्थगित की, मैं सोचता था कि उसके बाद स्वयं प्रधान मंत्री जी यहां आएंगे या कम से कम विदेश मंत्री जी आएंगे और जो बात बाहर कही है, सदन में कहेंगे, क्योंकि संसद का सत्र चल रहा है इसलिए सदन में कहना जरूरी है। पिछली बार इस इश्यू पर काफी चर्चा हुई है। मेरी मांग है कि प्रधान मंत्री जी या विदेश मंत्री जी तुंत यहां आएं और इस बात की पुष्टि करें। हम समझते हैं कि सचिवों की भी आपस में वार्ता करना बेकार है, जब तक हाफिज सईद के बारे में जो एक प्रकार से टच-स्टोन बन गया है, Saeed’s trial has become the acid test for Pakistan. ये विदेश मंत्री ने जो कहा है और इसके कारण All talks are futile until action is taken. इस बात का स्पष्टीकरण प्रधान मंत्री जी या विदेश मंत्री जी सदन में आकर दें, यही बयान फिर से दें, हम उसका स्वागत करेंगे।
श्री संजय निरुपम (मुम्बई उत्तर): माननीय अध्यक्ष महोदया, 26 नवम्बर को जो मुम्बई में आतंवादी हमला हुआ था, वह निश्चित तौर पर भूला नहीं जा सकता। उसके बाद भारत सरकार ने एक निर्णय लिया कि जब तक पाकिस्तान आतंकवाद के खिलाफ एक समाधानकारक कार्रवाई नहीं करता, तब तक बातचीत का कोई अर्थ नहीं है। जब तक पाकिस्तान अपने क्षेत्र में जो आतंकवादी ठिकाने हैं, उनका समूल नाश नहीं कर देता, तब तक बातचीत का कोई अर्थ नहीं है। मैं समझता हूं कि पहली बार भारत सरकार ने पाकिस्तान को अंतर्राष्ट्रीय मंच पर कठघरे में खड़ा किया, पाकिस्तान अकेला पड़ गया और उस दबाव में आकर आतंकवाद के खिलाफ सचमुच कार्रवाई की है। जिस प्रकार हम कई वर्षों से आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई लड़ रहे हैं बिल्कुल उसी प्रकार पिछले कुछ महीनों से पाकिस्तान भी आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई लड़ रहा है और पाकिस्तान बहुत परेशान है। …( व्यवधान)
अध्यक्ष महोदया : कृपया शांत रहिये।
श्री संजय निरुपम : हमने तो आपके नेता जी को बढ़िया से सुना…( व्यवधान)
MADAM SPEAKER: Nothing will go on record except what Shri Sanjay Nirupam is saying.
(Interruptions) … *
श्री संजय निरुपम : अध्यक्ष महोदया, पूरी दुनिया जानती है कि बैतुल्ला मसूद जैसे जो आतंकवादी हैं उनके साथ पाकिस्तान की लड़ाई चल रही है। बेनजीर भुट्टो, उनकी पूर्व प्रधान मंत्री आतंकवाद के हाथों शहीद हुई।
श्री राकेश सिंह (जबलपुर): आप पाकिस्तान की वकालत क्यों कर रहे हैं?
श्री संजय निरुपम : मैं वकालत नहीं कर रहा हूं। …( व्यवधान) आप चिंता मत करिये। आपसे ज्यादा राष्ट्रभक्त हिंदुस्तानी मैं हूं। …( व्यवधान) हमारी भी राष्ट्रभक्ति है, मैं भी राष्ट्रवादी हूं। मुम्बई पर जब हमला हुआ था तो ताज होटल पर जाने वाला पहला व्यक्ति संजय निरुपम था, शिव सेना और बीजेपी की तरफ से कोई नहीं आया।…( व्यवधान) मैडम, इस बात से इंकार नहीं किया जा सकता कि हाफिज सईद मुम्बई आतंकवादी हमलों का मास्टर-माइंड है और हाफिज सईद को पाकिस्तान को बुक करना पड़ेगा, यह मैं भी अपनी देश, आपनी पार्टी और सरकार की तरफ से मांग करता हूं। पिछले दिनों मैंने अखबारों में पढ़ा, हमारे गृह मंत्री महोदय ने कहा कि हाफिज सईद के संदर्भ में चौथा डोसियर भेजा जा चुका है। हो सके तो और भी डोसियर भेजिये। पाकिस्तान को जो कुछ करना है करे, लेकिन हाफिज सईद को नहीं छोड़ना है, पाकिस्तान पर लगातार दबाव बरकरार रखना है, ताकि मुम्बई हमलों के लिए जो जवाबदेह हैं, उनको सजा दी जा सके, उन्हें कानून के हवाले किया जा सके। लेकिन जिस प्रकार से आज पाकिस्तान में, आतंकवाद के खिलाफ, पाकिस्तान की सेना और सरकार लड़ रही है, उन आतंकवादियों के बारे में सारी इंफोर्मेंशन के आदान-प्रदान के लिए किसी प्रकार की बातचीत की आवश्यकता है। वह बातचीत विदेश सचिव, विदेश मंत्री के लेवल पर होगी, लेकिन इंफोर्मेशन शेयर करना आवश्यक है क्योंकि हम दोनों देश पड़ोसी हैं। यही बात पंडित जी कहा करते थे कि हम दोस्त बदल सकते हैं पड़ोसी नहीं बदल सकते। जब पड़ोस में आग लगी है, पड़ोस में जब आतंकवादी घटनाएं घट रही हैं तो कहीं न कहीं सूचनाओं के आदान-प्रदान के हिसाब से, मुझे लगता है कि बातचीत होनी चाहिए। लेकिन अन्य विषयों के ऊपर, बातचीत तब तक समाधानकारक नहीं हो सकती, जब तक कि सदा-सदा के लिए पाकिस्तान की जमीन पर, जो भारत के खिलाफ आतंकवाद की गतिविधियां चलाने वाले संगठन और आतंकवादी हैं, उनका समूल नाश नहीं किया जाता।इसलिए मैं भी सरकार से की तरफ से, पूरी मुम्बई की जनता की तरफ से मांग करता हूं कि हाफिज सईद को पुनः गिरफ्तार करे और उसे सजा देने के लिए पाकिस्तान सरकार कार्रवाई करे – भारत सरकार से मैं ऐसी मांग करता हूं।
श्री शरद यादव (मधेपुरा): अध्यक्ष महोदया, मुलायम सिंह जी, आडवाणी जी और यशवंत सिन्हा जी ने जो कहा है, मैं उन बातों को नहीं दोहराऊंगा। शर्म-अल-शेख में हमारे प्रधानमंत्री जी और पाकिस्तान के प्रधानमंत्री का जो संयुक्त बयान है, उसकी स्याही भी नहीं सूखी, हम यह बात इस मकसद से कह रहे हैं कि 26/11 के बाद जिस तरह से पाकिस्तान के खिलाफ जो वातावरण बना है और जिस तरह से पूरी दुनिया के सामने हमने पाकिस्तान को किनारे खड़ा किया था, यही बात हम सभी विपक्ष के लोग मिल कर कह रहे हैं कि एक अवसर देश के हाथ में आया था और 26/11 की घटना के बाद दुनिया भी मानती थी कि पाकिस्तान के जरिए हिंदुस्तान के ऊपर निरंतर अमानवीय हमले हो रहे हैं। पूरी दुनिया ने पाकिस्तान की निंदा करके उसे घेरने का काम किया था। शर्म-अल-शेख और बलूचिस्तान का जिक्र है, ये देश की समूची आम सहमति के विपरीत है। आज हाफिज सईद के मामले में यह बात साबित हो गई है। भारत सरकार की तरफ से बकायदा डोज़ियर दिया गया। अगर इस मामले में कोई मुख्य कुख्यात आदमी है, तो वह हाफिज सईद है और उसके साथ क्या हुआ, उसे मैं सदन में दोहराना नहीं चाहता हूं, सभी साथियों ने उसका जिक्र किया है। मैं आपसे यही कहना चाहता हूं कि वह स्याही भी नहीं सूखी और एसिड टेस्ट हाफिज सईद को पकड़ना, उसे सज़ा देना, यह भारत सरकार की तरफ से, विदेश मंत्री की तरफ से बयान आ गया कि अब बातचीत का कोई मतलब नहीं है, क्योंकि हाफिज सईद को पाकिस्तान का सम्मानित नागरिक घोषित करने का काम किया। मैं आपके माध्यम से यही निवेदन करना चाहता हूं, हमारा पक्ष यही है कि शर्म-अल-शेख में जो संयुक्त बयान जारी किया गया, उससे दुनिया के सामने पाकिस्तान का जो वातावरण बना हुआ था, उसे करारा झटका लगा है और उस करारे झटके का मतलब है कि हमारे विदेश मंत्री कहते हैं कि एसिड टेस्ट है। हम यही कहना चाहते हैं कि हम जो निरंतर बात कह रहे थे, उसका आकलन यही है कि भारत सरकार ने शर्म-अल-शेख में जो वक्तव्य दिया है, उससे यही जाहिर होता है कि वह देश के हितों के खिलाफ है।
महोदया, सदन चल रहा है और विदेश मंत्री जी ने बाहर कहा है, इससे कोई ऐतराज़ नहीं है, क्योंकि उस समय उत्तर देना जरूरी था, लेकिन भारत सरकार को अपने आप इस बात की सफाई देनी चाहिए कि ऐसा-ऐसा हुआ है और हमने जो कहा है कि आतंकवाद और वार्ता साथ-साथ चलेगी, यह ठीक नहीं था। अब यहां कहना चाहिए कि वार्ता नहीं चलेगी। नेता विपक्ष ने जो मांग की है, मैं उसका समर्थन करता हूं और चाहता हूं कि चाहे विदेश मंत्री हों या प्रधानमंत्री हों, इस बारे में सफाई दें और दूध का दूध पानी का पानी होना चाहिए। इन्हीं शब्दों के साथ मैं अपनी बात समाप्त करता हूं।
श्री लालू प्रसाद (सारण): अध्यक्ष महोदया, माननीय मुलायम सिंह यादव जी ने न तो अपनी पार्टी का और न ही कोई व्यक्तिगत सवाल किया है। यह सवाल देश से संबंधित है। देश के ऊपर जिसने खतरा पैदा किया है, भारत का बच्चा-बच्चा जानता है कि मुम्बई में जो जघन्य हमला हुआ है, उसका मास्टर माइंड हाफिज सईद था। यह नाम सुनकर पूरा देश सिहर जाता है। दो देशों के बीच बातचीत का कोई विरोध नहीं करता है, सरकार-सरकार स्तर पर बातचीत होनी चाहिए, इसमें कोई दो राय नहीं है। लेकिन भारत सरकार ने जो हाफिज सईद के खिलाफ पाकिस्तान को जो सबूत दिया है, जो प्रमाण पत्र दिया है इसमें खुद भारत सरकार ने माना और लगातार यह स्वीकार कर रही हैं कि हमने दिया है, यही मास्टर माइंड था, पाकिस्तान कार्यवाही करे, सख्त कार्यवाही करे। लेकिन यह कार्यवाही क्या करेगा?मैं लगातार देख रहा हूं कि चाहे अपने बयानों से, वक्तव्यों से, कामों से भारत सरकार का रास्ता जो चल रहा है, ये अपने बयानों में फंसते जा रहे हैं, सबक नहीं सीख रहे हैं। देहात में कहावत है – ‘दूध से अगर मुंह जल जाता है तो माठा पूंक-पूंक कर पिया जाता है।’ लेकिन हम चेत नहीं रहे हैं। फॉरेन मिनिस्टर साहब का बयान आया, हो सकता है टाइम्स ऑफ इंडिया पलट जाए कि बयान में हमने यह नहीं कहा था, लेकिन देश में सारी अखबार और सारी जगह यह मैसेज गया है कि पाकिस्तान सरकार ने भारत सरकार को दर्पण दिखा दिया। वहां के शासक ने हाफिज सईद को आईना दिखा दिया और बता दिया कि देखो, तुम्हारी यह हैसियत है। इस पर हम सब लोगों को सोचना चाहिए, विचार करना चाहिए कि क्या हुआ है। लेकिन जो हुआ है वह सबको मालूम है, वह घूम रहा है। हम पाकिस्तान के अवाम के खिलाफ नहीं हैं। पड़ोसियों से दोस्ती रहे, हम इसके खिलाफ नहीं हैं, बातचीत होनी चाहिए। लेकिन हम मार खाकर, पिटकर काफी प्रभावित होकर लगातार झेलते जा रहे हैं, इसे भारत सरकार की तरफ से माननीय प्रधानमंत्री, विदेश मंत्री स्थिति को स्पष्ट करें। माननीय मुलायम सिंह, शरद जी और सब लोगों की यही राय है। आडवाणी जी ने मुद्दा उठाया है, यह केवल उनका अपना सवाल नहीं है। अगर उन्होंने जय श्री राम की बात उठाई होती तो हम बैठे रहते। मैं मांग करता हूं और माननीय मुलायम जी, शरद जी ने जो कहा उसका समर्थन करते हुए कहता हूं कि सरकार आए और स्थिति को स्पष्ट करे। What is the truth behind it? सच्चाई क्या है? आप सच्चाई बताएं। What action are you going to take? …( व्यवधान)
श्री अनंत कुमार : लालू जी, राज्य विदेश मंत्री जी आए हैं लेकिन विदेश मंत्री नहीं आए हैं।…( व्यवधान)
अध्यक्ष महोदया : कृपया आपस में बात मत कीजिए।
…( व्यवधान)
श्री लालू प्रसाद : ये विदेश मंत्री को खबर कर देंगे। …( व्यवधान) भारत सरकार क्या रणनीति अख्तियार करेगी? यह हमारे देश के स्वाभिमान की बात है। जो अपराधी है, जिसने क्राइम किया है, उसे जब तक सजा नहीं मिल जाती, उस पर कार्यवाही नहीं हो जाती तब तक भारत को कैसे संतुष्ट किया जा सकता है? यह मैसेज गलत जा रहा है। सदन में वरिष्ठ नेताओं ने जो मांग रखी है और मैं भी मांग करता हूं क्योंकि यह देश का सवाल है। देश डिमॉरलाइज होता जा रहा है। हमारा यही कहना है कि इन कारणों से देश का मनोबल मिल रहा है इसलिए माननीय प्रधानमंत्री या विदेश मंत्री इस स्थिति को स्पष्ट करें।
MADAM SPEAKER: This matter is over. I will now take up other matters under ‘Zero Hour’.
… (Interruptions)
श्रीमती सुषमा स्वराज : इन्होंने जवाब मांगा है। इस तरह से मैटर कैसे ओवर हो जाएगा?…( व्यवधान)
श्री लाल कृष्ण आडवाणी : हमें तो ऑफिशियली पता था कि आप ही उनको स्वयं बुला लेंगी।…( व्यवधान) इस समय तो सदन के नेता भी नहीं हैं।…( व्यवधान) सरकार का कोई मुद्दा ही नहीं रहा?…( व्यवधान)
श्रीमती सुषमा स्वराज : संसदीय कार्य मंत्री यहां बैठे हैं, उन्हें पता है…( व्यवधान)
SHRI ANANTH KUMAR : We want a reply from the Government. … (Interruptions)
श्री जगदम्बिका पाल (डुमरियागंज): आपने सभी नेताओं को अवसर दिया है, हमें भी दीजिए।…( व्यवधान)
MADAM SPEAKER: I cannot compel the Government to give the reply.
… (Interruptions)
श्री लाल कृष्ण आडवाणी : विदेश मंत्री जवाब दें।…( व्यवधान)
श्रीमती सुषमा स्वराज : इससे तो मामला और उलझा है। हम सरकार से जानना चाहते हैं कि क्या प्रधानमंत्री विदेश मंत्री के बयान से सहमत हैं। या विदेश मंत्री ने प्रधान मंत्री जी को ओवररूल किया है?…( व्यवधान)
श्री अनंत कुमार : इस सरकार की कलैक्टिव रिस्पांसिबिलिटी है या नहीं?…( व्यवधान)
श्रीमती सुषमा स्वराज : क्या विदेश मंत्री ने प्रधान मंत्री को ओवररूल किया है?…( व्यवधान)
MADAM SPEAKER: It is a matter of ‘Zero Hour’. I cannot compel the Government to respond. हम बाध्य नहीं कर सकते। यह शून्य प्रहर का विषय है। हम सरकार को बाध्य नहीं कर सकते।
…( व्यवधान)
श्री मुलायम सिंह यादव : इस मुद्दे पर सरकार ने स्थिति स्पष्ट नहीं की है, इसके विरोध में हम वाक-आउट कर रहे हैं।
13.20 hrs.
(Shri Mulayam Singh Yadav and some other hon. Members then left the House)
श्री लालू प्रसाद : सरकार इस पर कोई जवाब नहीं दे रही है, इसके विरोध में हम सदन से वाक-आउट कर रहे हैं।
13.20½ hrs.
(Shri Lalu Prasad and some other hon. Members then left the House)
श्रीमती सुषमा स्वराज : क्या प्रधान मंत्री विदेश मंत्री के बयान से सहमत हैं या विदेश मंत्री ने प्रधान मंत्री को ओवररूल किया है? सरकार बताये। एक घर की सी स्थिति सदन में बन गई है।…( व्यवधान)
SHRI L.K. ADVANI : This cannot end here. आज ये एक्सैप्ट नहीं करना चाहते कि…( व्यवधान) लेकिन मैं बेसिकली बताता हूं कि या तो आप बताइये, घोषणा करिये कि इसका स्पष्टीकरण प्रधान मंत्री या विदेश मंत्री कब देंगे। यदि नहीं देते हैं तो फिलहाल इस समय बाहर एक वक्तव्य देकर…( व्यवधान) इस बारे में प्रधान मंत्री कुछ बोलते हैं और विदेश मंत्री कुछ और बोलते हैं। मैं इसे गलत मानता हूं, वह सदन में आकर यही बात कहते। …( व्यवधान) लेकिन मैं इसके विरोध में …( व्यवधान)
श्रीमती सुषमा स्वराज : यह पार्लियामैन्ट की अवमानना है। …( व्यवधान)वह अखबारों में बोलते हैं, यहां नहीं बोलते।…( व्यवधान) वह अखबारों में बोलते हैं, अंदर यहां नहीं बोलते। …( व्यवधान) यहां सदन में बोलेंगे तो कार्यवाही में जायेगा, रिकार्ड में जायेगा।…( व्यवधान) आप विदेश मंत्री को बुलाइये।
श्री अनंत कुमार : यह ठीक नहीं है…( व्यवधान)
MADAM SPEAKER: Nothing will go on record.
(Interruptions) … *
MADAM SPEAKER: I cannot compel the Government to respond. Let me take up other matters of the ‘Zero Hour’. Shri M.I. Shanavas.
श्री लाल कृष्ण आडवाणी : इसके खिलाफ हम सदन से वाक-आउट करते हैं।
13.22 hrs.
(Shri L.K. Advani and some other hon. Members then left the House)
MADAM SPEAKER: Whatever Mr. Madhu Goud Yaskhi speaks will go on record and nothing else.
(Interruptions) … *