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Lok Sabha Debates
Requested To Introduce First Class Compartments, Increase The … on 22 August, 2000

Title: Requested to introduce first class compartments, increase the number of AC two tier and AC three tier compartments and to improve the poor condition of toilet and other facilites in the Purushottam Express.

श्रीमती कान्ति सिंह (बिक्रमगंज) : धन्यवाद, अध्यक्ष महोदय। मैंने अभी सफर किया है, इसलिए मैं यह मसला उठा रही हूं। पुरुषोत्तम एक्सप्रैस नई दिल्ली से चलकर कानपुर, इलाहाबाद, मुगलसराय, सासाराम, देहरी, औरंगाबाद और गया होती हुई जमशेदपुर से पुरी तक जाती है। पुरुषोत्तम एक्सप्रैस टाटा के लिए खास तौर पर सबसे अच्छी ट्रेन है, लेकिन इसमें ए.सी.फस्र्ट क्लास का डिब्बा नहीं है, ए.सी. टू टियर की एक बोगी है और ए.सी. थ्री टियर की भी एक बोगी है। इतनी लम्बी दूरी तय करने वाली पुरुषोत्तम एक्सप्रैस में बहुत सारे लोग सफर करते हैं, लेकिन उन्हें आरक्षण नहीं मिल पाता है, इसलिए मैं आपके माध्यम से सरकार का ध्यान आकर्षित करना चाहती हूं कि उसमें ए.सी. फस्र्ट क्लास का डिब्बा लगाया जाये और ए.सी. टू टियर और ए.सी. थ्री टियर की बोगी बढ़ायी जाये।

इसके साथ ही उसके शौचालयों और डिब्बों की सफाई वगैरह भी ठीक से नहीं होती है। जो बैडरोल दिया जाता है, इसका जो आर.के. वाला बहुत बड़ा कांट्रेक्टर कांट्रैक्ट लेता है, उसकी बैडरोल की स्थिति भी बहुत दयनीय हो चुकी है। जब हम लोगों के साथ इस तरह की बातें होती हैं तो आम जनता के साथ क्या होता होगा, इसका अंदाज लगाया जा सकता है। उसमें भी सुधार लाने की जरूरत है। आपने मुझे बोलने का मौका दिया, इसके लिए आपको धन्यवाद।…( व्यवधान)

MR. SPEAEKR: What is this? I am calling everybody. Shri Satyavrat Chaturvedi, you were disturbing during the Question Hour and during Zero Hour also you are disturbing.

श्री सत्यव्रत चतुर्वेदी : अध्यक्ष जी, पार्लियामेंटरी अफेयर्स मनिस्टर ने मुझे जवाब देने के लिए बोला था, लेकिन अभी तक उनका जवाब नहीं आया।

अध्यक्ष महोदय : किसके बारे में?

श्री सत्यव्रत चतुर्वेदी : खजुराहो के लिए इंडियन एयरलाइंस की फ्लाइट के बारे में मैंने जीरो ऑवर में मामला उठाया था, उन्होंने कहा था कि सोमवार को इसका जवाब देंगे।…( व्यवधान)

MR. SPEAKER: हम पूछेंगे। Shri Athawale, I cannot understand your behaviour in the House. How many times I have to say that? Why do you not take it seriously? If you want to say anything, you have to take permission from the Chair. Without the permission of the Chair, how can you speak always?


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