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Requests The Central Government To Provide Citizenship To The … on 6 August, 1998

Lok Sabha Debates
Requests The Central Government To Provide Citizenship To The … on 6 August, 1998


Title: Requests the Central Government to provide citizenship to the refugees residing in Jammu and Kashmir for more than 50 years.

श्री चमन लाल गुप्त (ऊधमपुर): अध्यक्ष महोदय, मैं जम्मू कश्मीर का एक विशेष मुद्दा आपके द्वारा सदन के ध्यान में लाना चाहता हूं। श्री सोज़ जी ने एक मसला उठाया है, मैं पूरी तरह से उनके साथ हूं परंतु इतना मैं जरूर निवेदन करना चाहूंगा कि जम्मू-कश्मीर के अंदर जो उग्रवाद से पीड़ित लोग हैं, उनकी तरफ भी इनकी सरकार ध्यान दें कयोंकि सरकार द्वारा बिल्कुल ध्यान नही दिया जा रहा है। यह लाजिमी चीज है कि जो लोग वहां से उजड़ रहे हैं, उनको राशन दिया जाए, उनके ठहरने की व्यवस्था की जाए लेकिन सरकार उनकी तरफ बिल्कुल ध्यान नही दे रही है। जो मुद्दा मैं आपके ध्यान में लाना चाहता हूं, वह यह है कि १९४७ में जिस समय देश का विभाजन हुआ, उस समय वेस्ट पाकिस्तान से एक लाख के करीब हरिजन लोग जम्मू-कश्मीर के अंदर आकर बस गये थे। वे सारे देश के अंदर आकर बसे थे और सैटल हो गए लेकिन हमारा प्रदेश एक ऐसा अभागा प्रदेश है कि १९४७ से आए हुए लोगों को आज तक स्टेट असेम्बली में वोट डालने का अधिकार नहीं है। उनके बच्चे कॉलेज में भी नहीं पढ़ सकते हैं कयोंकि वह स्टेट सब्जेकट नहीं है। आज स्वतंत्रता के पचास वर्ष बीत जाने के बाद भी हरिजनों का एक बहुत बड़ा हिस्सा जो इस प्रदेश के अंदर बसा है, उनको किसी भी तरह का अधिकार नहीं दिया गया है।

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MR. SPEAKER: Shri Chaman Lal Gupta, constitutionally, they are SCs and STs and not harijans. So, you use the words SCs and STs and not harijans. श्री चमन लाल गुप्त :मेरी बात को ठीक करने के लिए बहुत-बहुत धन्यवाद। वे सब बंधु ऐसे हैं जिनको वहां वोट डालने का अधिकार नहीं मिल रहा है। उनके बच्चे मैटि्रक तक पढ़ लेते हैं लेकिन कॉलेज नहीं जा सकते हैं।

12.00 hrs. इसलिए मेरा सरकार से निवेदन है कि वहां जो रिफयूजीज़ हैं उन सब को भी वैसे अधिकार मिलने चाहिए, जिस तरह बाकी देश के अंदर सब को अधिकार हैं। वहां कुछ रिफयूजी १९६५ में बने, फिर १९७१ में बने और १९४७ के पहले से थे ही। जितने भी वहां रिफयूजीज़ हैं उन सब का मसला भारत सरकार तुरंत सुलझाए, हल करे। जम्मू-कश्मीर के नागरिक अपने को पूरी तरह भारत के नागरिक समझें, इस तरह की व्यवस्था सरकार करे, यह मेरा कहना है।

“>SHRI BUTA SINGH Mr. Speaker, Sir, I want to support him.

MR. SPEAKER: Shri Buta Singh, we have to accommodate many Members and it is already 12 o’clock. Please cooperate.

SHRI BUTA SINGH Sir, I will not take much time. I want to say only a few words in support of him.

Sir, thousands of families who have come from Pakistan do not have citizenship here. They are neither the citizens of Jammu and Kashmir nor the citizens of India. They have been deprived of their livelihood. Therefore, I support the issue raised by the hon. Member and I urge upon the Government to give them citizenship of Jammu and Kashmir, where they are residing for more than 50 years.