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Shri Ram Kripal Yadav Called The Attention Of The Minister Of Finance … on 22 December, 2005

Lok Sabha Debates
Shri Ram Kripal Yadav Called The Attention Of The Minister Of Finance … on 22 December, 2005


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Title : Shri Ram Kripal Yadav called the attention of the Minister of Finance regarding the need to formulate a Master Plan for development of backward areas of the country particularly thirty-six backward districts of Bihar as announced by Minister of Finance during Budget 2005-06.

 

MR. SPEAKER: Mr. Ram Kripal Yadav, please call the attention of the hon. Minister.

A little more alertness should be there. It is not that only the Speaker has to remain alert.

श्री राम कृपाल यादव अध्यक्ष महोदय, मैं वित्त मंत्री का ध्यान अविलम्बनीय लोक महत्व के निम्न विषय की ओर दिलाता हूं और प्रार्थना करता हूं कि वह इस संबंध में वक्तव्य दें :

“ बजट २००५-२००६ के दौरान वित्त मंत्री द्वारा की गई घोषणा के अनुसार, देश के पिछड़े क्षेत्रों विशेषकर बिहार के ३६ पिछड़े जिलों के विकास के लिए मास्टर प्लान तैयार किए जाने की आवश्य्ाकता[R19] । ”

 

* THE MINISTER OF FINANCE (SHRI P. CHIDAMBARAM) :  Sir, while presenting the Budget for 2005-06, I had announced the establishment of a Backward Region Grant Fund. I had made an allocation of Rs. 5000 crore in the Budget for 2005-06. I had also announced that consequent upon the establishment of the Fund, the existing Rashtriya Sam Vikas Yojana (RSVY) would be wound up with suitable transitional arrangements that will protect every district now covered under the RSVY. Under the transition arrangements, Bihar will continue to receive assistance under RSVY.

            I had also referred to the NCMP which lays emphasis on special economic packages for States including Bihar.… (Interruptions)

MR. SPEAKER: Silence please.

 

* Placed in Library. See No. LT 3511/05
SHRI P. CHIDAMBARAM: The Planning Commission is the nodal agency for designing and implementing the Backward Region Grant Fund. The Planning Commission has informed that the scheme is under finalization and has been circulated to the Ministries concerned. The draft proposal is like to be submitted to CCEA for approval shortly.… (Interruptions)

MR. SPEAKER: What is happening here? I cannot even listen to the Minister.

SHRI P. CHIDAMBARAM: At present 21 districts of Bihar are covered under the backward districts initiative of the RSVY. Districts plans have been approved for Rs. 45 crore per district over a three year period starting from 2003-04. An amount of Rs. 165 crore has already been released. However, the Government of Bihar has given utilization certificate for only part of the amount. It is expected that utilization certificates for the remaining amounts will be submitted in due course.

            In addition, under the Special Plan for Bihar, as part of RSVY, an amount   of Rs 270 crore has been already released in 2005-06.     … (Interruptions)

MR. SPEAKER: Please maintain silence.  It is very unfortunate.

श्री राम कृपाल यादव  सर, माननीय मंत्री जी ने ध्यान आकर्षण के जवाब में अपनी बात रखी है। मैं आपके माध्यम से माननीय मंत्री जी का ध्यान उनके बजट भाषण की ओर आकृष्ट करना चाहूंगा और उनके बजट भाषण से कुछ बातें उद्धृत करना चाहूंगा। उसमें उन्होंने कहा था क “ पिछले बजट में पिछड़े जिलों के लिए एक अनुदान नधि की घोषणा होने के बाद इस प्रस्ताव पर काफी विचार-मंथन हुआ है। एक अंत:मंत्रालयी समूह (आई.एम.जी) ने सामाजिक-आर्थिक रूप से प्रभावित करने वाले मानदंडों के आधार पर १७० पिछड़े जिलों की पहचान की है। आई.एम.जी. ने यह भी प्रस्ताव किया है कि नई सुविधा के अंतर्गत संसाधन, पंचायती राज संस्थाओं को समुचित अधिकार प्रदान किए जाने, जिसमें पदाधिकारियों और नधियों का अंतरण शामिल है, की शर्त पर होंगे। मैं आई.एम.जी. की सिफारिशों को स्वीकार करने का प्रस्ताव करता हूं और मुझे एक पिछड़े क्षेत्र अनुदान नधि की स्थापना की घोषणा करते हुए प्रसन्नता है। वर्ष २००५-२००६ के लिए आयोजना में ५,००० करोड़ रुपये का आवंटन किया गया है और अगले चार वर्षों में प्रतिवर्ष इतनी ही राशि आवंटित की जाएगी। इस नधि की स्थापना के परिणामस्वरूप, वर्ष २००६.२००७ में समाप्त होने वाली राष्ट्रीय सम विकास योजना (आर.एस.वी.वाई.) का उपयुक्त संक्रमण प्रबंधों, जो अब आर.एस.वी.आई. के अंतर्गत शामिल प्रत्येक जिले को संरक्षित करेंगे, के साथ परिसमापन किया जाएगा। ”

             दूसरा बजट भाषण जो बिहार के बारे में था, उस पर भी मैं माननीय मंत्री जी का ध्यान आकर्षित करना चाहूंगा। उसमें उन्होंने कहा था क “ राष्ट्रीय साझा न्यूनतम कार्यक्रम में बिहार, जम्मू व कश्मीर तथा पूर्वोत्तर क्षेत्र के लिए विशेष आर्थिक पैकेजों का उल्लेख है। अब तक बिहार ने आर.एस.वी.वाई. के माध्यम से विशेष सहायता प्राप्त की है। आर.एस.वी.वाई. के अधीन संक्रमण प्रबंध वर्ष २००६-२००७ तक जारी रहेंगे। इस बीच बिहार के पिछड़े जिले पिछड़े क्षेत्र अनुदान नधि से सहायता प्राप्त करना आरम्भ करेंगे। मैं यह भी उल्लेख करना चाहूंगा कि बिहार की आवश्यकताओं को मान्यता प्रदान करते हुए बारहवें वित्त आयोग ने वर्ष २००५-२०१० की अवधि के लिए ७,९७५ करोड़ रुपये की राशि के प्रचुर अनुदान दिए हैं[r20] । ”

स्वास्थ्य और शिक्षा के क्षेत्र में विकास के लिए विशेष अनुदान की आवश्यकता वाले कुछ राज्यों में से एक राज्य के रूप में बिहार की पहचान की गयी। देश में आजादी के बाद सर्वप्रथम प्रथम पंचवर्षीय योजना जब से लागू हुयी, बिहार की आवश्यकता के अनुरूप राशि आवंटित नहीं की गयी, जिसकी वजह से बिहार आज भी दयनीय स्थिति में है। बिहार की आवाम हमेशा इस ताक में रही कि केंद्र की सरकार हमें मदद करने का काम करेगी और हमारा हक और हिस्सा हमें मिलेगा। झारखंड के बटवारे के बाद बिहार की स्थिति और भी खराब हो गयी है। जो इस प्रदेश की आमदनी थी, उसकी ७० प्रतिशत राशी, जो बिहार में झारखंड आती थी, वहां चली गयी है और मात्र १०० में ३० रूपए ही शेष बिहार के लिए हैं, जहां ८ करोड़ की आबादी है, जहां रोड की स्थिति खराब है, जहां बिजली की स्थिति खराब है, जहां स्वास्थ्य और शिक्षा की स्थिति खराब है, जहां पानी की व्यवस्था खराब है, कहीं उद्योग-धंधा नहीं लग सका है, जो भी ज्वाइंट उद्योग बिहार में था वह बटवारे के बाद सब झारखंड के इलाके में चला गया। एक भी बड़ा उद्योग जो केंद्र के माध्यम से लगा था, वहां नहीं है। यही नहीं जो शेष बिहार का भू-भाग बचा है, वह खास तौर पर खेत पर निर्भर करता है, खेती पर निर्भर करता है। वहां उपयुक्त यह होता कि बंद चीनी मिलों को फिर से चालू कराने का काम किया गया होता, मगर हमेशा बिहार की उपेक्षा होती रही है। खासतौर पर पूर्ववर्ती सरकार ने लगातार ६ वर्षों तक बिहार के साथ दुव्र्यवहार किया है, सौतेलेपन का व्यवहार करने का काम किया है तथा अपने आप में इतिहास कायम रखा है। पूर्ववर्ती सरकार ने ग्रामीण विकास मंत्रालय के अंतर्गत, मैं एक विभाग की बात बताता हूं, , किस तरह से बिहार की उपेक्षा एनडीए की सरकार ने की है, मैं उसको उद्धृत कर रहा हूं कि प्रतिवर्ष ३०० करोड़ की दर से जो राज्य का हिस्सा था, लगभग १८०० करोड़ रूपए की कटौती की। एनडीए की सरकार ने ग्रामीण विकास मंत्रालय के अंतर्गत और वभिन्न विभागों के लिए जो राशि आनी चाहिए थी, वह नहीं देने का काम किया। वर्तमान यूपीए की सरकार जो पिछड़े और गरीब प्रदेशों के प्रति कमिटेड है, उसके उत्थान के लिए कमिटेड है, जिसके अनुसार माननीय वित्त मंत्री जी ने प्रस्ताव रखा कि देश के १७० ऐसे जिले हैं, जिनके विकास के लिए, जिनके उत्थान के हम ५००० करोड़ रूपए आवंटित करने का काम करेंगे।

MR. SPEAKER: What is your question?

श्री राम कृपाल यादवबड़े दुर्भाग्य के साथ कहना पड़ रहा है कि माननीय वित्त मंत्री जी ने जो जवाब दिया है, जो वादा किया था, बजट भाषण में जो कमिटमेंट था कि जो ३६ जिले बिहार के पिछड़े हुए हैं, एक जिला बचा है, पूरे प्रदेश को विशेष पैकेज देते। परंतु मैं समझता हूं कि उन्होंने गोलमटोल जवाब देने का काम किया है। मैं समझता हूं कि इससे बिहार का कल्याण होने वाला नहीं है। बिहार जो देश का सबसे पिछड़ा हुआ प्रदेश है, गरीबी से वहां की हालत खराब है। मैं पूछना चाहता हूं कि माननीय मंत्री जी की जो आपने १७० पिछड़े जिलों के लिए घोषणा की था कि ५००० करोड़ रूपए देंगे, जिसमें बिहार के ३६ जिले शामिल थे, उस राशि के बारे में क्या हुआ? ८ महीने हो गए, मगर आप ने एक रूपया भी बिहार के पिछड़े जिलों को देने का काम नहीं किया है।

MR. SPEAKER: There is a limit to everything. You are violating the rule every second.

श्री राम कृपाल यादवमैं अंतिम प्रश्न पूछकर अपनी बात को समाप्त करूंगा।

अध्यक्ष महोदय   ठीक है, पूछिए।

श्री राम कृपाल यादवमैं माननीय मंत्री जी से जानना चाहूंगा कि आप कब तक यह पैसा जारी करने जा रहे हैं और बिहार के पूरे तौर पर उत्थान के लिए क्या आपने कोई मास्टर प्लान बनाया है? क्या आप चाहते हैं कि बिहार जो पिछड़ा प्रदेश है, गरीब प्रदेश है, जिसकी हालत बहुत ही खराब है।

अध्यक्ष महोदय   इसका उत्तर इन्होंने दे दिया है।

श्री राम कृपाल यादवउसके उत्थान के लिए आप भविष्य में कौन सा स्टेप लेने जा रहे हैं? मैं आपके माध्यम से माननीय मंत्री जी से चाहूंगा कि बिहार के उत्थान के आप क्या कर रहे हैं?

अध्यक्ष महोदय   मंत्री जी जवाब कैसे देंगे? जब आप बैठेंगे तभी तो जवाब देंगे।  May I remind hon. Members – because it bas become necessary – that they have been misusing the facility which is given to them?

            I have been too liberal in allowing Caling Attention. The rule is:

“The shall be no debate on such statement at the time it is made but each member in whose name the item stands in the list of business may, with the permission of the Speaker, ask a clarificatory question and the Minister shall reply at the end to all such questions[r21] .”

 

            Because the Chair has been allowing, you are asking. Of course, there is no question of allowing now.  You are insisting forcibly that you must be given time for as long as you want.  The whole purpose of Calling Attention is coming to an end.  Therefore, I shall consider in future whether to allow or not. 

 Shri Sita Ram Yadav – not present.

… (Interruptions)

अध्यक्ष महोदय आप देख रहे हैं यहां सब लीडर्स हैं। इस तरह से कॉलिंग अटैन्शन का क्या होगा?

श्री प्रभुनाथ सिंह (महाराजगंज, बिहार) अध्यक्ष महोदय, यह आपकी उदारता की जरूरत है।

श्री देवेन्द्र प्रसाद यादव (झंझारपुर) अध्यक्ष महोदय, आपकी अनुमति है…( व्यवधान) 

अध्यक्ष महोदय  इस किताब को फेंक दीजिए, फिर उदारता देखेंगे।

…( व्यवधान)

अध्यक्ष महोदय   श्री देवेन्द्र प्रसाद यादव, आप बोलिए। क्वैश्चन पूछिए और थोड़ा लंबा क्वैश्चन पूछिए।

श्री देवेन्द्र प्रसाद यादवअध्यक्ष महोदय, एक माननीय सदस्य अनुपस्थित है, उनका भी प्रश्न पूछने की मुझे इजाजत दी जाए। अनुपस्थित सदस्य मेरे ही दल का मैम्बर है।

MR. SPEAKERyou have already lost 20 seconds.

श्री देवेन्द्र प्रसाद यादवमाननीय अध्यक्ष महोदय, आजादी की लड़ाई में बिहार सबसे आगे था लेकिन आज तक बिहार को पिछड़ेपन से निजात नहीं मिली है। इसका कारण इस जवाब में है जो बारह बजे आया है। यह जवाब विलंब से आया है। कॉलिंग अटैन्शन का जवाब दस बजे आना चाहिए था क्योंकि माननीय सदस्य उसे देखकर प्रश्न पूछते हैं। माननीय मंत्री जी ने इसमें आंकड़े दिए हैं।

MR. SPEAKER You are such an astute Member.   It is only a one-page statement.

श्री देवेन्द्र प्रसाद यादवआंकड़ों में दिया गया है कि राष्ट्रीय सम विकास योजना के तहत बिहार के २१ पिछड़े जिले हैं। जबकि इन २१ जिलों के बारे में शुरू में कहा गया था कि तीन साल तक एक-एक पिछड़े जिले को ४० करोड़ रुपए आबंटित किए गए हैं और १६५ करोड़ रुपए रिलीज किया गया है। राष्ट्रीय सम विकास योजना, स्पेशल प्लॉन के तहत २७० करोड़ रुपया रिलीज किया गया और २१

जिलों को ४५ करोड़ रुपए दिए गए, इस तरह से ९४५ करोड़ रुपए हो जाता है। अब मैं बीच वाले खंड के बारे में बताता हूं, इसमें लिखा गया है कि-

“The Planning Commission is the nodal agency for designing and implementing the Backward Region Grant Fund. Planning Commission has informed that the scheme is under finalisation and has been circulated to the Ministries concerned.   The draft proposal is likely to be sent to CCEA for approval shortly. ”

 

अध्यक्ष महोदय, यह जवाब बहुत दुर्भाग्यपूर्ण है। मुझे बड़े दु:ख के साथ कहना पड़ रहा है कि बिहार के साथ यह नाइंसाफी है। मैंने आपसे इसीलिए निवेदन किया था कि यह कब तक जाता रहेगा? वर्ष २००२ में इसी सर्वोच्च सदन में तत्कालीन वित्त मंत्री ने कहा था कि योजना आयोग के उपाध्यक्ष की अध्यक्षता में एक कोषांग सैल बिहार के पिछड़ेपन को दूर करने के लिए बनेगा, कोषांग सैल गठित होगा। लेकिन उस सैल का हश्र क्या हुआ? आज कहा जा रहा है कि प्लानिंग कमीशन इसे तैयार कर रही है और यह फाइनेलाइजेशन स्थिति में है। उसके बाद सी.सी.ई.ए. में जाएगा, फिर कैबिनेट कमेटी ऑफ इकनॉमिक अफेयर्स में जाएगा और उसके बाद एप्रूवल आएगो। हम भी मनिस्टर रहे हैं।

MR. SPEAKER: Shri Devendra Prasad Yadav, you know how to delay matters!

श्री देवेन्द्र प्रसाद यादवयह तो अनंत काल तक होगा। यह बिहार के साथ नाइंसाफी है। कॉलिंग अटैन्शन में पूरे देश के १७० पिछड़े जिले को चयन इन्टरमनिस्ट्रीरियल ग्रुप ने किया था। लेकिन हमारे जिले का हश्र क्या है? मैं जानना चाहता हूं कि बिहार के उन्नयन के लिए, बिहार के पिछड़ेपन को दूर करने के लिए कालबद्ध योजना के अन्तर्गत कब तक स्पैशल पैकेज देंगे?

बिहार के जिलों के लिए, यह आज तक, ऑन दि बेसिस ऑफ गाडगिल फार्मूला, ऑन दि बेसिस ऑफ पापुलेशन नहीं था, ऑन दि बेसिस ऑफ इंटर्नल रिसोर्सिस ऑफ दि कन्सर्निंग स्टेट था और इसी तरह से प्लान बिहार को मिलता रहा है। यदि सरकार की यही नीति रही, तो बिहार का पिछड़ापन सात जन्म तक दूर नहीं होगा। अगर यही स्पीड रही तो बिहार का पिछड़ापन दूर नहीं हो सकता है। इसीलिए ऑन दि बेसिस ऑफ पावर्टी, ऑन दि बेसिस ऑफ पापुलेशन, ऑन दि बेसिस ऑफ नीड ऑफ स्टेट होना चाहिए न कि ऑन दि बेसिस ऑफ इंटर्नल रिसोर्सिस होना चाहिए[sk22] ।

[RB23] 

झारखंड बनने के बाद जो नदी नाले रह गये है, खनिज चले गये हैं औरबिहार जो बचा हुआ है, उसकी स्थिति अब नॉर्थ ईस्ट स्टेट्स की तरह है। अध्यक्ष महोदय, आपके पड़ोसी राज्य असम की भी यही स्थिति है…( व्यवधान) 

अध्यक्ष महोदय  इसलिये तो मैंने आपको अलाऊ किया है।

श्री देवेन्द्र प्रसाद यादवआज बिहार आर्थिक बदहाली से गुजर रहा है। इसलिये मैं मंत्री जी से जानना चाहता हूं क बिहार में राष्ट्रीय सम विकास योजना के अंतर्गत उन क्षेत्रों का विकास करें ताकि बिहार राष्ट्र की मुख्यधारा से जुड़ जाये। इसलिये क्या प्लानिंग कमीशन ने जो सैल गठित करने की बात कही थी, उसमें बिहार के लिये कितनी राशि विमुक्त करने जा रहे हैं। जब तक यह फाइनल होगा, यह प्लानिंग कमीशन में रहेगा, सीसीईए में जाता रहेगा। इससे बिहार नैगलैक्ट होता रहेगा और इस एक्सरसाईज से बिहार में विलम्ब होगा। मैं सरकार से जानना चाहता हूं कि इसे कब तक पूरा किया जायेगा?

श्री गणेश प्रसाद सिंह अध्यक्ष महोदय, माननीय मंत्री जी ने अपने उत्तर में बताया है कि उन्होंने राष्ट्रीय सम विकास योजना के लिये १६५ करोड़ रुपया विमुक्त किया है। साथ ही यह भी कहा है कि विशेष योजनाओं के तहत २७० करोड़ रुपया विमुक्त किया है। माननीय मंत्री जी मूल प्रश्न से विचलित होना चाह रहे हैं। ध्यानाकर्षण में मुख्य प्रश्न यह था कजिन पिछड़े जिलों की पहचान की गई है, वे पूरे देश के १७० जिले हैं लेकिन बिहार के ३८ जिलों में कितने जिलों को छोड़ दिया गया है, कितने जिलों को लिया गया है और शायद इसमें सीवान जिले को छोड़ दिया गया है। मैं आपके माध्यम से कहना चाहता हूं कि माननीय वित्त मंत्री जी ने २८ फरवरी, २००५ को अपने बजट भाषण में कहा था…( व्यवधान) 

अध्यक्ष महोदय आप उन लोगों की बात पूछ रहे हैं, कोई नई बात पूछिये।

श्री गणेश प्रसाद सिंह अध्यक्ष जी, अपने बजट भाषण में वित्त मंत्री जी ने कहा था कि आर्थिक और समाजिक रूप से पिछड़े क्षेत्रों के लिये एक नधि स्थापित की जायेगी जो स्थापित की गई है और उसने पांच हजार करोड़ रुपये…( व्यवधान) प्रत्येक वर्ष राशि उपलब्ध कराने का आश्वासन दिया गया था ।   

अध्यक्ष महोदय  यह बात राम कृपाल यादव पूछ चुके हैं।

श्री गणेश प्रसाद सिंहमैं वही पूछ रहा हूं कि यह राशि पांच करोड़ रुपये दी जायेगी। माननीय मंत्री जी ने उत्तर में बताया है क प्लानिंग कमीशन के पास मामला लम्बित है लेकिन प्लानिंग कमीशन अभी तक कुछ नहीं कर रहा है। जो राशि विलम्ब से पहुंचे और जिन योजनाओं को स्वीकृत करने में इतना विलम्ब होता हो, क्या मंत्री जी मार्च, २००५ के अंदर इस विशेष योजना के तहत, पिछड़ा क्षेत्र अनुदान योजना के तहत स्वीकृति प्रदान कर राशि विमुक्त करने की कृपा करेंगे?

MR. SPEAKER: Hon. Members, I have been humbly seeking your cooperation.   I have already said that I would not allow any other Member who has not given a notice.  As an exception since one Member is not present today, I am allowing Shri Prabhunath Singh. 

… (Interruptions)

श्री प्रभुनाथ सिंह अध्यक्ष जी, आप उदार हैं।

MR. SPEAKER Shri Prabhunath Singh, I have allowed you to put only one question and beyond one question, it will be deleted.  

… (Interruptions)

श्री प्रभुनाथ सिंह अध्यक्ष महोदय, मैं आपके आदेश का पालन करूंगा और कोई लम्बा क्वैश्चन नहीं पूछूंगा।

श्री रबिन्दर कुमार राणा (खगड़िया) अध्यक्ष जी, मैंने भी इसका नोटिस दिया है लेकिन मेरा नाम नहीं है।

अध्यक्ष महोदय  क्या आपको मालूम है कि किस ढंग से नाम आता है?

श्री रबिन्दर कुमार राणाअध्यक्ष जी, मैंने नाम दिया है।

अध्यक्ष महोदय  आप अपने नेता से पूछ लीजिये।

श्री प्रभुनाथ सिंह अध्यक्ष जी, माननीय मंत्री जी के उत्तर में कहा गया है कि बिहार के इसमें २१ जिलों को शामिल किया गया है…( व्यवधान) 

MR. SPEAKER: Shri Prabhunath Singh, you put only one question.

… (Interruptions)

श्री प्रभुनाथ सिंह अध्यक्ष महोदय, मैं जानना चाहता हूं कि बाकी जिलों का क्या होगा, जो छोड़ दिये गये हैं?

अध्यक्ष महोदय  बाकी जिलों का क्या होगा?

श्री प्रभुनाथ सिंह अध्यक्ष जी, माननीय मंत्री जी ने कहा है कि वह राष्ट्रीय सम विकास योजना समाप्त कर रहे हैं। इस योजना में बिहार के २१ जिलों के लिये पैसा दिया गया है। उस हिसाब से ४५ करोड़ रुपया आवंटित किया गया है लेकिन मेरी जानकारी के अनुसार वह ४५ करोड़ रुपया पदाधिकारियो के पास य़ह कह कर रख दिया है कि वह तय करेंगे कि कौन सा काम होगा, कितना होगा, उसमें तो घपला और लूटपाट होगी। उसमें जनप्रतनधियों को शामिल नहीं किया गया है कि वे भी अपने सुझाव दें और उन पर विचार किया जाये।

अध्यक्ष महोदय, मैं आपके माध्यम से जानना चाहता हू कि जो सुझाव जनप्रतनधियो ने बिहार सरकार को दिये हैं, क्या उन सुझावों को प्राथमिकता दी जायेगी या नहीं? जिन जिलों को छोड़ दिया गया है, क्या उन जिलों को २१ जिलों के अलावा शामिल किया जायेगा, यह हम जानना चाहते हैं।

MR. SPEAKER: It is a very pertinent question.

… (Interruptions[RB24] )

श्री प्रभुनाथ सिंह सर, मैंने एकदम प्वाइंटेड क्वैश्चन पूछा है।

अध्यक्ष महोदय  उसी वजह से मैंने आपको अलाऊ किया है।

SHRI P. CHIDAMBARAM  Sir, hon. Members will recall that the Backward Regions Grant Fund was intended to be an expanded and restructured RSVY. But I made it very clear that until the Backward Regions Grant Fund is established, the RSVY will continue. In fact, the RSVY is continuing since 2003-2004 and while the Planning Commission is in the final stages of designing and submitting it to CCEA for approval, it is not correct to say that the RSVY stood suspended. The RSVY is still being implemented and the money earmarked in the Budget is being spent under RSVY. When the Backward Regions Grant Fund is established it will be subsumed in the Backward Regions Grant Fund and it will be spent as Backward Regions Grant Fund.

            Therefore, there is no question of money not being released. I have figures for the whole country up to 22nd of December, 2005. In 2003-2004 a sum of Rs. 1,073.25 crore was released. That was the last year of the NDA Government. In 2004-2005 a sum of Rs. 1,764.09 crore was released. That was the first year of the UPA Government. In the current year we have, so far, released to the whole country under RSVY a sum of Rs. 1,014.12 crore. The total release, if you add the Rs. 200 crore that was given to Orissa under KBK in 2002-2003, is Rs. 4,051 crore. But, as of today, the expenditure reported to us is only Rs. 2,256 crore. … (Interruptions)

श्री गणेश प्रसाद सिंह: बिहार के लिए कितना रिलीज किया है?

SHRI P. CHIDAMBARAM  I am coming to it. Please wait a minute. I am giving you the figures.

            We have released, including the amount of Rs. 200 crore under KBK, a sum of Rs. 4,051 crore and the expenditure reported by all the States is Rs. 2,256 crore. Now, let me come to Bihar. In Bihar, for reasons which I do not wish to go into now, nothing was released to Bihar in 2003-2004 under RSVY. The UPA Government released Rs. 157.50 crore divided into 21 districts at the rate of  Rs. 7.50 crore per district as the first instalment. We have received, so far, and in the current year, from one district an utilisation certificate. Because we have received the utilisation certificate we have released another Rs. 7.5 crore. We have received no utilisation certificate in respect of any other district for any other part of the money.

            The rules are very clear. The rules say that the second instalment will be released once you give an expenditure statement for 60 per cent of the first instalment. When that is not given, how does the Government, bending its rule, release more money? I would respectfully submit that all hon. Members from Bihar should urge upon the State Government – I am not saying this Party Government or that Party Government – to please send us the utilisation certificate so that we can release the further instalments of money.

            Sir, apart from this, as all of you know, an amount of Rs. 1,000 crore was earmarked for Bihar under a special plan and that is what I have mentioned in the last paragraph of my statement. Under that special plan, an amount of Rs. 270 crore has been released to Bihar in 2005-2006. I submit with great respect that I can only provide the money and ask Parliament to vote for it. If Parliament votes  it, as it did, the money is available. The money can only be given according to the rules. The money has been given to 21 districts of Bihar according to the rules. The next instalment of money can be given only if the rules are obeyed and the utilisation certificates are furnished. As and when utilisation certificates are furnished, money will be released and I am confident that the Planning Commission will get the approval of the CCEA for the Backward Regions Grant Fund. … (Interruptions)

श्री प्रभुनाथ सिंह हमने जो सवाल पूछा था, उसका उत्तर नहीं आया।

MR. SPEAKER  Will other districts be included in RSVY?

… (Interruptions)

श्री प्रभुनाथ सिंह हमारी जनप्रतनधियों के सुझाव वाली बात का क्या हुआ?

श्री देवेन्द्र प्रसाद यादवबिहार के विकास के लिए टाइम बाउंड प्लानिंग कब बनेगी?

MR. SPEAKER : On your behalf I have put the question.

… (Interruptions[krr25] )

MR. SPEAKER: I will ask him not to reply if you do it in this manner.

… (Interruptions)

MR. SPEAKER: Please take your seat. I am coming to your matter.

… (Interruptions)

SHRI P. CHIDAMBARAM Sir, as far as districts are concerned, until the Backward Regions Grant Fund is approved by the CCEA, we are bound to implement the RSVY in the 21 districts already identified. When the Backward Regions Grant Fund proposal is approved, the districts will be listed there and only then, I can make the districts public. Before Cabinet approval, how do I say which are the districts? At the moment, 21 districts are covered. … (Interruptions)

                                                                                                                       

MR. SPEAKER: No doubt, your matter will be considered.

… (Interruptions)

MR. SPEAKER Since the hon. Minister is here, we may take next Calling Attention, item no. 28.