Title: Urged upon the Government to carry out the census in Jammu and Kashmir once again under supervision of the local MPs.
(जम्मू) : उपाध्यक्ष महोदय, जो विषय मैं इस समय सदन में उठा रहा हूं वह बहुत महत्वपूर्ण विषय है। सैंसद जो किसी देश की राजनीति व आर्थिक प्लानिंग की आधार है, उस द्ृष्टि से मेरा कहना यह है कि जम्मू-कश्मीर में जो जनगणना हुई है, वह सच्चाई के आधार पर नहीं की गई है। उसमें जो फिगर्स दिए गए हैं वे फिक्टीशियस फिगर्स दिए गए हैं। जनगणना में जम्मू की आबादी ४३ लाख व श्रीनगर की ५४ लाख बताई है, जो तथ्यों पर आधारित नहीं है।
उपाध्यक्ष महोदय, हमारे जम्मू में दो पार्लियामेंट्री सीटें हैं और श्रीनगर सूबे में तीन पार्लियामेंट्री सीटें हैं। जम्मू के दोनों संसदीय क्षेत्रों में २४ लाख ६४ हजार और श्रीनगर के तीनों संसदीय क्षेत्रों की आबादी २४ लाख १० हजार और कुछ संख्या बताई गई है। इसका मतलब यह है कि जो सैंसस रिपोर्ट है उसका कोई काऊंटर चैक नहीं होता है जबकि वोटर लिस्ट को हर साल पालटिकल पार्टीज चैक करती हैं। इसलिए वोटर लिस्ट ज्यादा ऑथेंटीकेटेड होती हैं। यदि जम्मू की वोटर लिस्ट ज्यादा है, तो इसका मतलब यह है कि वहां की पापुलेशन ज्यादा है। इसके बाद जो वोटर कश्मीर से मायग्रेट कर के जम्मू में आबाद हुए हैं उनकी संख्या ५-६ लाख के बीच में है, लेकिन वे वोटर अभी भी श्रीनगर की वोटर लिस्ट में मौजूद हैं, जबकि उनके नाम वहां की वोटर लिस्ट से हटाए जाने चाहिए। इसके अतरिक्त जो लोग पाकिस्तान से मायग्रेट कर के आए हैं उनकी संख्या भी लगभग डेढ़ लाख है जो जम्मू में बसे हैं। इस प्रकार से वोटर लिस्ट और वास्तविक तथ्यों को देखें तो जम्मू की आबादी जो दर्शाई गई है उससे साढ़े १० लाख ज्यादा होनी चाहिए थी।…( व्यवधान ) उसके बदले श्रीनगर का साढ़े १० लाख आबादी ज्यादा दिखाई गई है जो सही नहीं है।
उपाध्यक्ष महोदय : शर्मा जी, आप भारत सरकार से क्या चाहते हैं, वह बताइए।
वैद्य विष्णु दत्त शर्मा: उपाध्यक्ष महोदय, मैं कहना चाहता हूं कि जो सैंसस की गई है वह गलत है, वह वास्तविक तथ्यों के विपरीत है। इसलिए मैं भारत सरकार से मांग करता हूं कि वहां की जनगणना दुबारा कराई जाए और अपनी निगरानी में कराई जाए ताकि फैक्ट्स सामने आ सकें। …( व्यवधान )