Title: Need to check pollution caused by NTPC and SECL units in Korba region, Chhatisgarh- Laid.
(जांजगीर):अध्यक्ष महोदय, छत्तीसगढ़ में पर्यावरण सुधार तथा प्रदूषण नियंत्रण की गंभीर समस्या उत्पन्न हो गयी है। एन.टी.पी.सी. कोरबा क्षेत्र में राख पूरित जमीन पर पिछले साल वृक्षारोपण कराया गया है, जिसमें आसपास के क्षेत्र की उपजाऊ अच्छी जमीन की मिटटी खोद कर डाला गया है, साथ ही पौधों को उगाने के लिये रसायनिक पदार्थो तथा रसायनिक खादों का उपयोग किया गया है। पर्यावरण सुधार एवं प्रदूषण नियंत्रण के लिये किये जा रहे उपायों से स्वयंमेव प्रदूषण विस्तार हो रहा है, साथ ही आसपास की अच्छी मिट्टी भी इन राख के समुद्रों में डूबकर स्वाहा हो जावेगी। वृक्षारोपण में लगाये गये पौधों की संख्या कागजों में तो लाखों है, लेकिन भौतिक रूप से ऐसा नहीं है। इसी तरह की स्थिति कमोवेश एस.ई.सी.एल कोरबा की है। खोदी जा रही खदानों की भराई तथा उन पर वृक्षारोपण का कार्य नगण्य है। छत्तीसगढ़ राज्य विद्युत मंडल की कोरबा इकाई में कस्बे के बीच में सैंकड़ों एकड़ राख पूरित ढेर पड़ा हुआ है, उसमें धीरे धीरे इन्क्रोचमेंट कर कुछ स्थानों में मकान भी बन रहे हैं। अत: मेरा सरकार से आग्रह है कि न केवल एन.ट.पी.सी. वरन देश के उन सभी स्थानों, जहां राख पूरित भूमि है अथवा बंजर या पड़त भूमि है, वहां पर आसपास के क्षेत्रों की उपजाऊ भूमि की मिटटी के उपयोग पर तत्काल पूर्णत: बंदिश लगायी जाये तथा प्रदूषण के रोकथाम के लिये किये जाने वाले वृक्षारोपण के लिये रसायनिक पदार्थो एवं रसायनिक खादों के उपयोग पर रोक लगायी जाये ताकि भविष्य में एक बीमारी की रोकथाम के लिये किये गये उपायों का दुष्परिणाम दूसरी बीमारी का जन्म जैसी समस्या से बचा जा सके।