an>
Title : Need to formulate a policy for vendors by the Railways.
श्री बची सिंह रावत ‘बचदा’ (अल्मोड़ा) : सभापति महोदय, यह विषय रेलवे से संबंधित है। भारतीय रेल में सन् १९५५ में स्वर्गीय लाल बहादुर शास्त्री द्वारा खान-पान सेवा प्रारंभ की गई थी और कमीशन वैंडर्स के रूप में एक नई व्यवस्था तय की गई, जिन्हें रेलवे द्वारा राशन, तेल, नमक, सब्जी आदि दी जाती थी। उनके द्वारा सामान्य यात्रियों को सस्ती दर पर पूरी और आलू की सब्जी उपलब्ध करवाई जाती थी। वह व्यवस्था अभी तक चली आ रही थी, लेकिन रेलवे द्वारा उसमें कोई स्पष्ट नीति नहीं तय की गई और कमीशन वैंडर्स ६५, ७५ साल की उम्र के हो गए। रेलवे मंत्रालय द्वारा इस उम्र में कम्पलसरी रिटायरमैंट के नाम पर उनका राशन बंद कर दिया गया और उन्हें रिटायरमैंट दी जा रही है। कोई नीतिगत सेवा शर्त तय नहीं होने के कारण इस उम्र में बिना किसी सेवा लाभ के उन्हें कहा जा रहा है कि आपकी रिटायरमैंट हो गई जो कतई गलत है। यदि उन्हें इस उम्र में हटाया जाना जरूरी है, तो हटाने वाले वैंडर के एक आश्रित को तत्काल वैंडिग की अनुमति दी जाए और इस समय जो मृतक वैंडर हो गए हैं, उनके एक आश्रित को भी वैंडिंग की अनुमति दी जाए। दूसरी ओर रेलवे कैटरिंग और कैंटीन का जो कार्पोरेशन बनाया गया है, उसकी रोज शिकायतें आ रही हैं कि जमीन पर पूरियां बेली जा रही हैं और उन्हें कोचेज़ में सर्व किया जा रहा है, अखबार इसे रिपोर्ट कर रहे हैं।…( व्यवधान)
हमारी मांग है कि अगर रेलवे उन कमीशन वैंडर्स को रिटायरमैंट दे रहा है तो उन्हें उसके लाभ दिए जाने चाहिए, जैसे अन्य कर्मचारियों को मिलते हैं। अगर उन्हें रिटायर कर रहे हैं और लाभ नहीं दे रहे हैं तो कम से कम उनके एक आश्रित को कमीशन वैंडिंग की अनुमति प्रदान की जाए और ऐसे ही मृतक आश्रित के लिए किया जाए।