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Title : Need to streamline the process of admission from primary to higher educational institutions in the country.
श्री शैलेन्द्र कुमार (चायल) : माननीय उपाध्यक्ष महोदय, भारतीय संविधान में व्यवस्था के अनुसार शिक्षा एक मौलिक अधिकार है और सभी को शिक्षा दी जाए। लेकिन आज देखा गया है कि पूरे देश में, चाहे वह प्राइमरी शिक्षा हो या उच्च शिक्षा, शिक्षण संस्थाओं में बच्चों के अभिभावकों को उनके एडमीशन में बड़ी दिक्कतें हो रही हैं। खासकर आप सभी शिक्षण संस्थानों के गेट में जाकर देख लीजिए कि वहां लोगों की भारी भीड़ जमा है। सबसे बड़ी बात यह है कि अभिभावकों का इंटरव्यू लिया जा रहा है। मेरे ख्याल से इंटरव्यू दाखिले की सौदेबाजी का आखिरी पड़ाव है। इंटरव्यू में अभिभावकों से यह कहा जाता है कि आप डोनेशन कितनी देंगे, आप बिल्िंडग फंड कितना देंगे आदि इस तरह की बातें वहां की जा रही हैं। हमारा कहना है कि बच्चों की प्रतिभा को आंकने का मापदंड इंटरव्यू नहीं है। लेकिन फिर भी माननीय उच्च न्यायालय ने बच्चों के दाखिले में उनके अभिभावकों से जो इंटरव्यू लिया जा रहा है, उस पर रोक लगायी है। जितनी भी शिक्षण संस्थाओं की प्रबंध कमेटी के लोग हैं, वे इस बात को लेकर सुप्रीम कोर्ट में गये। सुप्रीम कोर्टे ने वापस उस याचिका को उच्च न्यायालय में भेज दिया। अब उच्च न्यायालय ने कहा है कि एक सामाजिक आम सहमति बनानी चाहिए चाहे वह गरीब का बच्चा हो या अमीर का बच्चा हो, सबको प्रवेश मिलना चाहिए।
उपाध्यक्ष महोदय, मैं आपके माध्यम से सरकार से आग्रह करना चाहूंगा कि कम से कम बच्चों के एडमिशन में इंटरव्यू की प्रथा रोकी जाये और सभी तबकों अनुसूचित जाति-जनजाति, पिछड़े वर्ग या उच्च वर्ग के बच्चों की प्रतिभा के अनुसार ही उनको प्राइमरी से लेकर उच्च शिक्षा में प्रवेश दिया जाये।