13.00 hrs.
Title: Regarding facilities given to the Delhi Police.
: उपाध्यक्ष महोदय, मैं आपके माध्यम से सदन का ध्यान दिलाना चाहता हूं कि जब दिल्ली के नागरिक अपने घर में दिवाली मना रहे होते हैं, जब होली मना रहे होते हैं, तो दिल्ली की पुलिस के जवान सड़कों पर पहरा देकर चौकसी कर रहे होते हैं। उनकी कठिन एवं जोखिम भरी डयूटी के कारण ही उन्हें १२ महीने में १३ महीने की तनख्वाह दी जाती है और जो बढ़े हुए एक महीने का वेतन है उसके ऊपर उन्हें डी.ए. भी दिया जाता रहा, लेकिन अब उस एक महीने के वेतन पर दिया जाना वाला डी.ए. बन्द कर दिया गया है जो कि लगातार पिछले अनेक वर्षों से बदस्तूर मिलता रहा था। दिल्ली पुलिस हमारी रक्षा में लगी हुई है और अपनी जान की परवाह न कर मुस्तैदी से दिल्ली के नागरिकों की रक्षा कर रही है, लेकिन उनके बढ़े हुए एक महीने के वेतन पर डी.ए. के कम किए जाने से उन्हें बहुत कठिनाई हो रही है, जो न्यायसंगत नहीं है। इसी प्रकार दिल्ली पुलिस के जवानों को एक वर्ष में १५ दिन का आकस्मिक अवकाश (केजुअल लीव) मिलता था, उसे भी घटाकर १० कर दिया गया है, जो न्यायोचित नहीं है। चूंकि उनकी कोई एसोसिएशन या यूनियन नहीं है और वे अपनी आवाज नहीं उठा सकते हैं इसलिए उनके साथ सरकार द्वारा इस प्रकार अन्याय किया जाना ठीक नहीं है।
उपाध्यक्ष महोदय, मैं इस सदन के माध्यम से सरकार से मांग करता हूं कि उन्हें दिल्ली पुलिस को दिल्ली की सुरक्षा करने के लिए माडर्न इक्विपमेंट मुहैया कराए जाएं, उनके डी.ए. को पुन: चालू किया जाए और जो आकस्मिक छुटि्टयां १५ से घटाकर १० की गई हैं, उन्हें १५ किया जाए। यहां कानून मंत्री जी उपस्थित हैं। मैं चाहता हूं कि वे इस पर अपनी प्रतक्रिया व्यक्त करें। यदि वे इस मामले पर सदन को आश्वस्त करेंगे, तो दिल्ली पुलिस भी आभारी रहेगी और हम भी उनके आभारी होंगे।